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Big Breaking:-मुफ्ती हशीम बने दून के नए शहर काजी, उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने चयन की प्रक्रिया पर उठाए सवाल

देहरादून में मुफ्ती हशीम अहमद सिद्दीकी को नया शहर काजी नियुक्त किया गया है। जामा मस्जिद कमेटी ने उन्हें यह पद सौंपा।

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं, क्योंकि उनका कहना है कि कमेटी भंग हो चुकी है और उनसे राय नहीं ली गई। मुस्लिम सेवा संगठन ने भी इस नियुक्ति का विरोध किया है।

देहरादून: मौलाना मुफ्ती हशीम अहमद सिद्दीकी देहरादून के नए शहर काजी होंगे। जामा मस्जिद पलटन बाजार के इमाम रहे सिद्दीकी को देहरादून शहर का नया काजी नियुक्त किया गया है।

जामा मस्जिद कमेटी ने उन्हें जामा मस्जिद और ईदगाह बिंदाल पुल का इमाम और शहर काजी बनाने का ऐलान करते हुए पगड़ी पहनाई। वहीं, इस मामले में उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने चयन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

बीते शनिवार को शहर काजी मौलाना मोहम्मद अहमद कासमी का इंतकाल हो गया था। इसके बाद से नए शहर काजी की तैयारियां चल रही थी।

शुक्रवार को जुमा की नमाज के बाद जामा मस्जिद पलटन बाजार प्रबंधन समिति के अध्यक्ष नसीम अहमद ने दो वर्ष से जामा मस्जिद पलटन बाजार में इमामत के फराईज अंजाम दे रहे मुफ्ती हशीम सिद्दीकी कासमी को नए शहर काजी बनाने का ऐलान किया।

उन्होंने कहा कि जामा मस्जिद पलटन बाजार और ईदगाह के इमाम ही हमेशा से शहर काजी रहे हैं। इसलिए मुफ्ती हशीम कासमी को शहर काजी बनाया जा रहा है। मुफ्ती हशीम मुफ्ती हशीम दारुल उलूम देवबंद से पढ़ें है।

2021 में भंग हो चुकी कमेटी, मामला वक्फ बोर्ड अपने हाथ लेगा: शम्स

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने इस फैसले पर एतराज जताया है। बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने बताया कि इस मामले में बोर्ड से भी राय लेनी पड़ती है। जिस कमेटी ने नए शहर काजी का ऐलान किया वह वर्ष 2021 में भंग हो चुकी है।

नई कमेटी बनाने की तैयारी चल रही थी। इसके लिए बाकायदा कमेटी के लोगों से कहा गया था कि इस मामले में कोई भी जल्दीबाजी न दिखाएं।

सभी की राय और सलाह के बाद ही शहर काजी बनाया जाए। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और जिस कमेटी को अधिकार नहीं था उसी ने शहर काजी बना दिया।

हमारे पास कई शिकायत भी आ रही हैं। बोर्ड इस मामले को अपने हाथों में लेगा और बक्फ बोर्ड की बैठक में इस मामले को रखा जाएगा।

वहीं, इस मामले में मुस्लिम सेवा संगठन ने भी विरोध जताया है। कहा कि कमेटी का कार्यकाल 2021 में समाप्त हो चुका है।

कतिपय कमेटी में अध्यक्ष व सचिव का पद रिक्त है। इन दोनों ही कारणों से कमटी का निर्णय असंवैधानिक है जिसे माना नहीं जा सकता।

शहर में भी जो उलेमा हैं अधिकांश से कोई मशविरा नहीं किया गया। मुस्लिम सेवा संगठन इस गैरकानूनी नियुक्ति का विरोध करता है।

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