Big Breaking:-NDPS केसों की समीक्षा, एडीजी लॉ एंड ऑर्डर के निर्देश, नशा तस्करी के गैंगस्टरों की संपत्ति जब्त की जाए

एडीजी लॉ एंड ऑर्डर वी मुरुगेशन ने आज वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिय सभी जनपद के पुलिस प्रभारियों और एसटीएफ को निर्देश दिए हैं.

देहरादून: एनडीपीएस के लंबित मामलों को समय से निस्तारण करने के लिए एडीजी कानून व्यवस्था ने वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिय सभी जनपद के पुलिस प्रभारियों और एसटीएफ को निर्देश दिए हैं.

वाणिज्यिक मात्रा के लंबित मामलों की समीक्षा करते हुए ड्रग नेटवर्क तोड़ने के निर्देश दिए गए है. साथ ही नशा तस्करी पर कड़ा रुख अपनाते हुए गैंगस्टर एक्ट सहित संपत्ति जब्ती तक की कार्रवाई की जाए.

दरअसल, अपर पुलिस महानिदेशक अपराध एवं कानून व्यवस्था ने एक साल से अधिक समय से लंबित वाणिज्यिक मात्रा संबंधी मुकदमों का निर्धारित समय सीमा के अन्दर निस्तारण करने के निर्देश दिए गए.

गढ़वाल परिक्षेत्र के जनपदों के कुल 33 और कुमाऊ परिक्षेत्र के 44 वाणिज्यिक मात्रा से संबंधित लंबित मामलों के मुकदमों की समीक्षा करते हुए साक्ष्यों के आधार पर गैंगस्टर एक्ट, पिट एनडीपीएस एक्ट और एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत कार्रवाई करते हुए धारा 68 के अन्तर्गत संपत्ति अधिग्रहण की कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए.

नशा तस्करी में गिरफ्तारी के बाद मुख्य ड्रग तस्करों के नेटवर्क को ध्वस्त कर कठोर विधिक कार्रवाई की जाए. परिक्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षकों को ऐसे मुकदमों का समय-समय पर निकट पर्यवेक्षण कर वैधानिक कार्रवाही करने के लिए निर्देशित किया गया. भारत सरकार के संबंधित पोर्टल का प्रभावी उपयोग करने के निर्देश दिए गए.साथ ही अभ्यस्त अपराधियों की हिस्ट्रीशीट खोलकर उनकी निरंतर निगरानी करने के लिए निर्देशित किया गया.

अपर पुलिस महानिदेशक वी मुरुगेशन ने बताया कि बैठक में स्पष्ट किया गया है कि नशा तस्करी के मामलों में किसी भी प्रकार की शिथिलता, लापरवाही अथवा मिलीभगत पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी, जिन मामलों में मादक पदार्थ की परीक्षण रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद भी विवेचना लंबित है, उनकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए. बाकी विवेचनात्मक कार्रवाई पूरी करने के लिए विवेचकों को एक महीने की समयावधि प्रदान की गई.

साथ ही जनपद हरिद्वार के दो प्रकरणों, जनपद देहरादून और नैनीताल के एक-एक प्रकरण में अन्वेषण में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित विवेचकों के खिलाफ प्रारंभिक जांच कर नियम अनुसार विभागीय कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए. साथ ही क्षेत्राधिकारियों को भी पर्यवेक्षण का स्तर सुधारने के लिए निर्देशित किया गया.

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