
इन दिनों इसकी प्रक्रिया चल रही है। मानकों को पूरा करने वाले मदरसों को ही संबद्धता और मान्यता दी जाएगी।
प्रदेश का एक भी मदरसा अब तक उत्तराखंड बोर्ड से संबद्ध नहीं हुआ न ही किसी मदरसे को उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता मिली है। यह हाल तब है, जबकि स्कूली शिक्षा में नया शिक्षा सत्र एक अप्रैल से शुरू हो चुका है।
राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी बताते हैं कि हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और देहरादून में से केवल हरिद्वार जिले से 10 मदरसों ने अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान की मान्यता के लिए आवेदन किया है।
राज्य में 452 मदरसे हैं और एक जुलाई को मदरसा बोर्ड खत्म हो रहा है, लेकिन मदरसों को अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान के रूप में न तो मान्यता मिली न ही संबद्धता।
विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इन दिनों इसकी प्रक्रिया चल रही है। मानकों को पूरा करने वाले मदरसों को ही संबद्धता और मान्यता दी जाएगी। राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी बताते हैं कि मान्यता की प्रक्रिया चल रही है।
प्राधिकरणों को इसके लिए आवेदन मिल रहे हैं। उत्तराखंड बोर्ड के सचिव विनोद सिमल्टी के मुताबिक अभी किसी भी मदरसे को बोर्ड की ओर से संबद्धता नहीं दी गई है।









