उत्तराखंड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र (यूएलएमसी) ने मसूरी राजमार्ग पर पानीवाला बैंड भूस्खलन की प्रारंभिक रिपोर्ट लोक निर्माण विभाग को सौंपी है।
देहरादून। मसूरी राज्य राजमार्ग पर पानीवाला बैंड के पास हुए भूस्खलन और सड़क धंसाव को लेकर उत्तराखंड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र (यूएलएमसी) ने प्रारंभिक रिपोर्ट लोक निर्माण विभाग को सौंप दी है। केंद्र ने मौके के निरीक्षण के बाद भूस्खलन का विस्तृत विज्ञानी अध्ययन कराने की जरूरत बताई है।
केंद्र के निदेशक डा. शांतनु सरकार ने कहा कि लोनिवि चाहे तो केंद्र इस स्थल का विस्तृत अध्ययन कर सकता है। इसमें भूस्खलन की प्रकृति, उसके कारण, भविष्य में इसके संभावित प्रभाव और ढलान को स्थिर करने के उपायों का अध्ययन किया जाएगा। साथ ही क्षतिग्रस्त हिस्से में सड़क और सुरक्षा दीवार के पुनर्निर्माण की उपयुक्त तकनीक भी तय करने में मदद मिलेगी।
20 जुलाई की रात धंसी थी सड़क
पानीवाला बैंड के पास गत 20 जुलाई की रात भारी वर्षा के बाद सड़क का करीब 10 मीटर हिस्सा धंस गया था। सड़क की उपयोगी चौड़ाई घटकर करीब ढाई मीटर रह गई थी। लोनिवि ने तत्काल जेसीबी लगाकर पहाड़ी का हिस्सा काटकर अतिरिक्त चौड़ाई तैयार की और यातायात को बहाल किया था।
लोनिवि के अनुसार सड़क के नीचे करीब 25 से 30 मीटर हिस्से में जमीन खिसकने के साथ पानी का स्रोत भी मौजूद है। यही कारण है कि यहां केवल ऊपर से सड़क की मरम्मत कर देना पर्याप्त नहीं माना जा रहा है।
अब सिर्फ मरम्मत नहीं, पहाड़ की प्रकृति समझेगा केंद्र
यूएलएमसी के निदेशक डा. शांतनु सरकार के अनुसार विस्तृत अध्ययन में यह देखा जाएगा कि भूस्खलन किस प्रकृति का है। इसके पीछे वास्तविक कारण क्या हैं और भविष्य में इसका फैलाव या दोबारा सक्रिय होने की कितनी संभावना है।
इसके आधार पर ढलान को स्थिर करने के लिए जरूरी तकनीकी उपाय सुझाए जाएंगे। क्योंकि, पानीवाला बैंड पर 20 जुलाई को सड़क धंसने के बाद 22 जुलाई को इसी क्षेत्र में पहाड़ी से मलबा और पेड़ सड़क पर आ गिरे थे। इससे पहले भी यह क्षेत्र बरसात में भूस्खलन के लिहाज से संवेदनशील रहा है।
मसूरी रोड के दूसरे संवेदनशील हिस्सों पर भी नजर
पानीवाला बैंड की घटना ने मसूरी राजमार्ग के दूसरे संवेदनशील हिस्सों की चिंता भी बढ़ाई है। लोनिवि के सूत्रों के अनुसार यूएलएमसी से गलोगी क्षेत्र के ऊपरी और निचले हिस्से, मैगी प्वाइंट और झड़ीपानी क्षेत्र समेत अन्य भूस्खलन संभावित जोन का भी अध्ययन कराया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार मसूरी राजमार्ग के ढलान वाला करीब 50 प्रतिशत क्षेत्र अत्यधिक संवेदनशील है।
गलोगी क्षेत्र में जिस भूस्खलन जोन का पहले से उपचार चल रहा है, वहां नया बड़ा भूस्खलन नहीं हुआ है। हालांकि, आसपास एक स्थान पर मिट्टी खिसकने की घटना सामने आई थी। ऐसे में पानीवाला बैंड के विस्तृत अध्ययन के साथ ही राजमार्ग के दूसरे संवेदनशील हिस्सों की भी तकनीकी जांच महत्वपूर्ण हो गई है।