
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 अप्रैल को टिहरी बांध की पंप स्टोरेज प्लांट (पीएसपी) परियोजना की चौथी यूनिट का वर्चुअल लोकार्पण करेंगे। इस लोकार्पण के साथ ही यह परियोजना एशिया की सबसे बड़ी पीएसपी जल विद्युत परियोजना बन जाएगी।
नई टिहरी। टीएचडीसी के लिए 14 अप्रैल का दिन ऐतिहासिक होने जा रहा है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देहरादून दौरे के दौरान टिहरी बांध की पंप स्टोरेज प्लांट (पीएसपी) परियोजना की चौथी और अंतिम यूनिट का लोकार्पण वर्चुअल माध्यम से करेंगे।
इस लोकार्पण के साथ ही टिहरी जल विद्युत परियोजना एशिया की सबसे अधिक पीएसपी विद्युत उत्पादन करने वाली जल विद्युत परियोजना बन जाएगी।
टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड की ओर से विकसित इस महत्वाकांक्षी पीएसपी परियोजना की कुल स्थापित क्षमता 1000 मेगावाट है। परियोजना के तहत 250-250 मेगावाट की चार यूनिटें स्थापित की गई हैं। इनमें से तीन यूनिटों का संचालन पहले ही शुरू हो चुका है,
जिनका लोकार्पण केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर की ओर से किया जा चुका है। अब चौथी यूनिट के शुरू होने के साथ यह परियोजना पूर्ण रूप से चालू हो जाएगी।
पंप स्टोरेज प्लांट एक आधुनिक और अत्याधुनिक तकनीक है, जिसमें अतिरिक्त बिजली का उपयोग करके पानी को ऊंचाई पर स्थित जलाशय में पंप किया जाता है और जरूरत के समय उसी पानी से बिजली उत्पादन किया जाता है। इससे ग्रिड संतुलन बनाए रखने और पीक डिमांड के समय बिजली उपलब्ध कराने में मदद मिलती है।
टिहरी बांध पहले से ही देश की प्रमुख जल विद्युत परियोजनाओं में शामिल है, जहां से 1000 मेगावाट बिजली उत्पादन हो रहा है। इसके अलावा कोटेश्वर बांध से 400 मेगावाट बिजली मिल रही है। अब पीएसपी के 1000 मेगावाट जुड़ने के बाद कुल उत्पादन क्षमता 2400 मेगावाट तक पहुंच गई है।
टीएचडीसी के मुख्य महाप्रबंधक (कोरपोरेट एंव संचार) डॉ. एएन त्रिपाठी के अनुसार इस परियोजना के पूर्ण संचालन से उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत में बिजली आपूर्ति को स्थिरता मिलेगी। साथ ही यह परियोजना नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने और कार्बन उत्सर्जन को कम करने की दिशा में भी अहम भूमिका निभाएगी।
टिहरी परियोजना का यह विस्तार न केवल राज्य के विकास को नई गति देगा, बल्कि भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।









