राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 13 जून को भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) की पासिंग आउट परेड का निरीक्षण करेंगी, जो ऐसा करने वाली आठवीं राष्ट्रपति होंगी।
देहरादून। भारतीय सैन्य अकादमी (आइएमए) का ड्रिल स्क्वायर एक बार फिर ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने जा रहा है। 13 जून को होने वाली पासिंग आउट परेड में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू निरीक्षण अधिकारी होंगी। वह, आइएमए परेड का निरीक्षण करने वाली आठवीं राष्ट्रपति होंगी।
सैन्य अनुशासन, परंपरा और गौरव का प्रतीक यह परेड हर बार नए अधिकारी कैडेटों के भारतीय सेना में शामिल होने के साथ एक नए अध्याय का संकेत देती है। इस बार का आयोजन न केवल प्रशिक्षण की पूर्णता का प्रतीक है, बल्कि सर्वोच्च संवैधानिक पद से जुड़ी एक महत्वपूर्ण उपस्थिति को भी दर्ज करेगा।
बता दें कि आइएमए की स्थापना एक अक्टूबर 1932 को हुई थी। शुरुआत मात्र 40 कैडेटों के प्रशिक्षण से हुई, लेकिन आज यह अकादमी एक समय में 1,660 कैडेटों के प्रशिक्षण की क्षमता तक पहुंच चुकी है। अब तक यहां से 66 हजार से अधिक अधिकारी पास आउट हो चुके हैं, जिनमें विदेशी कैडेट भी शामिल हैं।
अकादमी के इतिहास में 1962 का वर्ष एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है, जब तत्कालीन राष्ट्रपति डा. एस.राधाकृष्णन ने आइएमए को निशान प्रदान किया था। यह क्षण आज भी संस्थान की पहचान और गौरव का स्थायी प्रतीक बना हुआ है।
अब तक सात राष्ट्रपति परेड का निरीक्षण कर चुके हैं। इनमें प्रथम राष्ट्रपति डा. राजेंद्र प्रसाद से लेकर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद तक शामिल हैं। हर राष्ट्रपति की उपस्थिति ने इस परंपरा को और अधिक प्रतिष्ठा प्रदान की।
इस बार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मौजूदगी न केवल परंपरा की निरंतरता को दर्शाती है, बल्कि बदलते समय में सैन्य संस्थानों और संवैधानिक नेतृत्व के बीच मजबूत होते संबंधों का भी संकेत देती है।
आइएमए परेड का निरीक्षण करने वाले राष्ट्रपति
डा. राजेंद्र प्रसाद, डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, फखरुद्दीन अली अहमद, आर. वेंकटरमन, डा. एपीजे अब्दुल कलाम, प्रतिभा पाटिल व रामनाथ कोविंद
पहली बार पास आउट होंगी महिला कैडेट
इस बार आइएमए के 94 वर्षों के इतिहास में पहली बार महिला कैडेट पुरुष कैडेटों के साथ ड्रिल स्क्वायर पर कदमताल करेंगी।
अब तक महिला अधिकारियों का प्रशिक्षण मुख्य रूप से आफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी, चेन्नई में होता रहा है, लेकिन आइएमए में उनकी भागीदारी को बड़े संरचनात्मक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
अगस्त 2022 में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में महिला कैडेटों का पहला बैच शामिल हुआ था। इनमें से आठ कैडेटों ने भारतीय सेना में जाने का निर्णय लेकर जुलाई 2025 में आइएमए में प्रवेश लिया। ये सभी कैडेट वर्तमान में आइएमए में प्रशिक्षण ले रही हैं।