Big Breaking:-उत्तराखंड में करोड़ों के साइकिल ट्रैक बेपटरी, ग्रीन मोबिलिटी पर उठे सवाल

उत्तराखंड में पर्यावरण संरक्षण और ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए बने साइकिल ट्रैक अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रहे हैं। इससे सुरक्षित साइक्लिंग का उद्देश्य पूरा नहीं हो रहा।

देहरादून। पर्यावरण संरक्षण और ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखंड में शुरू हुई साइकिल ट्रैक की पहल अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाई है। राजधानी समेत अन्य शहरों में करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए कई साइकिल ट्रैक अधूरे हैं या अतिक्रमण और वाहनों की पार्किंग की भेंट चढ़ चुके हैं।

सवाल उठ रहा है कि पहाड़ी राज्य में पर्यावरण अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने का यह प्रयास कागजों तक ही सीमित तो नहीं रह जाएगा।

देहरादून सहित राज्य के प्रमुख शहरों में बढ़ते वाहनों और ट्रैफिक दबाव को देखते हुए साइकिल परिवहन को प्रोत्साहित करने की योजना बनाई गई थी। इसका उद्देश्य छोटी दूरी के लिए साइकिल को सुरक्षित विकल्प बनाना, वायु प्रदूषण कम करना और युवाओं को साइक्लिंग के लिए बेहतर बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराना था।

पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर देहरादून में राजपुर रोड और रेसकोर्स सहित कई प्रमुख मार्गों पर साइकिल ट्रैक बनाए गए, लेकिन यह पहल जमीन पर प्रभावी नहीं हो सकी।

पायलट प्रोजेक्ट

  • देहरादून के राजपुर रोड क्षेत्र में लगभग 4.81 करोड़ रुपये की लागत से करीब 2.6 किमी साइकिल ट्रैक विकसित किया गया।
  • रेसकोर्स क्षेत्र में 4.60 करोड़ रुपये की लागत से स्मार्ट साइकिल ट्रैक परियोजना शुरू की गई।

मौजूदा हाल

  • देहरादून – कुछ मार्गों पर साइकिल ट्रैक बने, लेकिन कई जगह अतिक्रमण और पार्किंग से प्रभावित।
  • हरिद्वार –साइक्लिंग की संभावना, पर साइकिल ट्रैक का व्यवस्थित नेटवर्क नहीं।
  • ऋषिकेश – पर्यटन शहर होने के बावजूद समर्पित साइकिल ट्रैक का अभाव।
  • नैनीताल –पर्यटन क्षेत्र में संभावनाएं, लेकिन ट्रैक विकसित नहीं।
  • हल्द्वानी –योजना बनी, लेकिन जमीन पर काम आगे नहीं बढ़ सका।

साइकिल ट्रैक का नेटवर्क विकसित नहीं हो सका
कई स्थानों पर साइकिल ट्रैक का निर्माण होने के बावजूद उनका उपयोग सीमित रह गया है। कई जगह ट्रैक पार्किंग में बदल गए हैं, जबकि कुछ स्थानों पर सीमांकन लाइनें मिटने और रखरखाव के अभाव में साइकिल चलाना मुश्किल हो गया है। इससे सुरक्षित साइक्लिंग को बढ़ावा देने का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है।

बढ़ सकता है इको-टूरिज्म
उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में साइकिल आधारित परिवहन कई मायनों में उपयोगी हो सकता है। छोटी दूरी के लिए साइकिल के उपयोग से ईंधन की खपत कम होगी, प्रदूषण और ट्रैफिक दबाव घटेगा, जबकि पर्यटन क्षेत्रों में इको-टूरिज्म और एडवेंचर गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है। साथ ही युवाओं में स्वास्थ्य और फिटनेस संस्कृति को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

राज्य में ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। विभिन्न शहरों में साइकिल ट्रैक की स्थिति की समीक्षा की जा रही है और जहां आवश्यकता होगी वहां सुधार तथा नई योजनाओं पर काम किया जाएगा।

-आर राजेश कुमार, सचिव-आवास

Ad Ad

सम्बंधित खबरें