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Big Breaking:-अल्मोड़ा और रामनगर में एक ही बाघिन ने किया हमला, पगमार्क्स के मिलान से हुआ खुलासा 

रामनगर के भलौन और अल्मोड़ा के खोल्यों क्यारी में एक ही बाघिन ने हमला किया। वन अधिकारियों ने पगमार्क्स के मिलान से इसकी पुष्टि की। मां से बिछड़ने के कारण शिकार के गुर न सीख पाने से यह बाघिन आदमखोर बन गई। इसने लगभग सौ किलोमीटर का सफर तय किया। डीएनए रिपोर्ट का इंतजार है।

रानीखेत। कार्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) से लगे मोहान रेंज के खोल्यों क्यारी गांव में बचुली देवी को शिकार बनाने वाला गुलदार नहीं बल्कि भलौन (रामनगर डिवीजन) में रेस्क्यू की गई बाघिन थी।

दोनों स्थानों के पगमार्क्स एक जैसे होने के बाद वन क्षेत्राधिकारी ने खुलासा किया कि खोल्यों क्यारी में महिला व भलौन में मजदूर पर हमला करने वाली बाघिन एक ही है।

यह भी पता लगा है कि कुनबे से बिछड़ी यह बाघिन मां से शिकार करने के सटीक गुर नहीं सीख पाने से आदमखोर बन गई। कालागढ़ रेंज से खोल्यों क्यारी में बचुलीदेवी को मारकर मध्यरात्रि बाद दूसरे प्रहर कोसी रेंज से करीब सवा दो वर्ष की यह बाघिन बेतालघाट से लगे डौनपरेवा (रामनगर वन प्रभाग) पहुंच गई थी। दो दिन बाद लौटकर भलौन में श्रमिक पर हमला बोला। उसे वहां रेस्क्यू कर लिया गया था। अलबत्ता, डीएनए की जांच रिपोर्ट का भी इंतजार किया जा रहा है।

वाकया बीती 31 दिसंबर का है। तल्ला सल्ट की खोल्यों क्यारी वन पंचायत में घास लेने गई बुजुर्ग बचुली देवी को वन्यजीव ने मार डाला था। देर शाम उसका क्षत विक्षत शव बरामद हुआ। ग्रामीणों ने इसे बाघ का हमला करार दे शव लेकर रानीखेत मोहान स्टेट हाईवे पर धरना दिया।

डीएफओ दीपक सिंह, एसडीओ काकुली पुंडीर व वन क्षेत्राधिकारी उमेश पांडे ने मुआयना कर घटना स्थल के आसपास बाघ के दो व गुलदार का एक पिंजड़ा लगा 15 कैमरे ट्रैप भी फिट किए।

शव पर लगे हिंसक वन्यजीव के बाल व लार के नमूने लेकर देहरादूर लैब भेजे गए ताकि पता लग सके कि हमलावर बाघ है या गुलदार। डीएफओ दीपक सिंह ने मौके मिले पगमार्क का भी अध्ययन किया। वन्यजीव विशेषज्ञों की भी मदद ली।

टाइगर कंजर्वेशन फाउंडेशन सीटीआर के सदस्य एवं बाघ विशेषज्ञ एजी अंसारी ने भी गहनता से जांच की थी। उधर कैमरे में न तो कोई गतिविधि कैद हुई ना पिंजड़े में भी फंसा।

बाघ के संदेह पर ही अल्मोड़ा के साथ आए सीटीआर, कालागढ़ व आरटीआर

इधर मोहान रेंज में रामनगर से लगी सीमा पर बाघ की गतिविधियां दिखाई देने पर गश्ती दल सतर्क हुआ। 50 से 60 वन कर्मियों की दिन व रात्रि में लगातार कांबिंग व पेट्रोलिंग बढ़ने पर बाघ कोसी रेंज की ओर उतर रामनगर की सीमा में चला गया था।

सूत्रों की मानें तो कालागढ़ के वन कर्मियों ने एक माह पहले ही मां से बिछड़ी बाघिन के गले में रेडियोकालर पहनाया था। ताकि उसकी लोकेशन व गतिविधियां पता लग सके।

वहीं खोल्यों क्यारी में बाघ के हमले की आशंका में अल्मोड़ा वन प्रभाग, सीटीआर व कालागढ़ टाइगर रिजर्व, मंदाल रेंज आदि के साथ निदेशक राजाजी टाइगर रिजर्व (आरटीआर) कोको राेजे ने छह सदस्यीय तेज तर्रार वन कर्मी पेट्रोलिंग को भेजे।

वन क्षेत्राधिकारी उमेश पांडे के अनुसार 31 दिसंबर की शाम खोल्यों क्यारी में बचुली देवी को मारने के बाद बाघिन मोहान रेंज से मध्यरात्रि बाद रात लगभग दो से ढाई बजे के बीच कोसी जलागम के जंगल से होकर डौनपरेवा पहुंच गई थी।

उस ओर पेट्रोलिंग बढ़ने पर बाघिन इसी रूट से वापस लौट रामनगर के भलौन पहुंची जहां उसने श्रमिक पर हमला कर दिया। रेडियोकालर से पता लगा था कि इस अवधि में इस बाघिन ने करीब सौ किमी का सफर तय किया।

‘भलौन में जिस बाघिन ने श्रमिक को मारा, उसी ने खोल्यों क्यारी गांव में बचुलीदेवी को भी मारा था। पगमार्क्स का मिलान करने के बाद यह पुष्टि हुई है। जिस उम्र में उसने अपनी मां से शिकार के गुर सीखने थे, उसी उम्र में वह मां से बिछड़ गई।

कुशल शिकारी न होने से ही वह मानव को कमजोर समझ सीधा हमला करने लगी थी। अभी डीएनए रिपोर्ट नहीं आई है। एहतियातन हमारी टीम प्रभावित गांवों में लगातार गश्त कर रहे हैं।
– उमेश पांडे, वन क्षेत्राधिकारी’

‘दोनों घटनाओं में एक ही बाघिन शामिल रही, अभी डीएनए की जांच रिपोर्ट का भी इंतजार किया जाना चाहिए। क्रास चेक करने के बाद स्थिति और पुष्ट हो जाएगी।


– एजी अंसारी, सदस्य टाइगर कंजर्वेशन फाउंडेशन सीटीआर एवं वन्यजीव विशेषज्ञ’

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