
उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण को स्मार्ट सिटी बनाने की सरकार की योजना से नई उम्मीद जगी है। पूर्व में राज्य राजधानी क्षेत्र और नगर पालिका उन्नयन जैसे वादे अधूरे रहे थे।
गैरसैंण। ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। यह बजट सत्र को लेकर नहीं, बल्कि सरकार ने जिन तीन पहाड़ी शहरों को स्मार्ट सिटी बनाने का ऐलान किया है, उनमें गैरसैंण भी शामिल है। इससे गैरसैंण की टीस मिटने की उम्मीद जगी है। यद्यपि, ग्रीष्मकालीन राजधानी बनने के बाद गैरसैंण का घोषणाओं से पुराना नाता है।
छह साल पहले गैरसैंण के चारों ओर 45 किलोमीटर की परिधि के क्षेत्र को राज्य राजधानी क्षेत्र बनाने की बात हुई थी। इसे लेकर कसरत भी हुई, लेकिन इसका मसौदा शासन की फाइलों से अब तक बाहर नहीं निकल पाया है।
यही नहीं, गैरसैंण को नगर पंचायत से नगर पालिका परिषद में उच्चीकृत करने का सपना भी अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। ऐसे में इस चुनावी साल में स्मार्ट सिटी को लेकर सरकार गंभीरता से कदम बढ़ाएगी, ऐसी अपेक्षा गैरसैंण क्षेत्र के निवासियों के मन में है।
गढ़वाल और कुमाऊं मंडलों के मध्य में चमोली जिले में स्थित गैरसैंण केवल एक भौगोलिक स्थान भर नहीं, बल्कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन की भावनाओं का केंद्र है। यह भावनाएं गैरसैंण को राज्य की राजधानी बनाने की थी।
नौ नवंबर 2000 को उत्तराखंड बनने के बाद राजनीतिक दलों ने गैरसैंण के नाम का उपयोग सियासी फायदे के लिए किया, लेकिन इसे राजधानी का दर्जा देने में परहेज करते रहे। ये बात अलग है कि गैरसैंण शहर से लगभग 15 किमी पहले भराड़ीसैण में विधानसभा भवन के साथ ही परिसर का निर्माण हुआ और वहां साल में एक बार विधानसभा सत्र भी होने लगे।
लंबी प्रतीक्षा के बाद आखिरकार चार मार्च 2020 को तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया। इससे उम्मीदों के सागर ने भी हिलोरें ली।
45 किमी के क्षेत्र को विकसित करने का ख्वाब
ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित होने के बाद तत्कालीन सरकार ने भराड़ीसैंण (गैरसैंण) के 45 किलोमीटर की परिधि को राज्य राजधानी क्षेत्र (एससीआर) बनाने का निश्चय किया गया था। एससीआर के दायरे में गैरसैंण से लगे तीन जिलों चमोली, पौड़ी व अल्मोड़ा के कर्णप्रयाग, थराली, चौखुटिया, द्वाराहाट, थलीसैंण तक के क्षेत्र शामिल करने की बात कही गई थी।
ताकि, मूलभूत सुविधाओं के पसरने के साथ ही रोजगार व स्वरोजगार के अवसर सृजित होने से इस पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल सके। इसके लिए 25000 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान था। एससीआर के सिलसिले में शासन स्तर पर मंथन होने के साथ ही योजना का खाका भी खींचा गया। इसके अलावा गैरसैंण नगर पंचायत को नगर पालिका परिषद के रूप में उच्चीकृत करने का निर्णय भी लिया गया था।
स्मार्ट सिटी से नए स्वरूप में निखरेगी ग्रीष्मकालीन राजधानी
समुद्रतल से 7000 फीट से ज्यादा की ऊंचाई पर स्थित गैरसैंण को अब स्मार्ट सिटी बनाने का इरादा जताया गया है, ताकि ग्रीष्मकालीन राजधानी नए स्वरूप में निखर सके। स्मार्ट सिटी के स्वरूप का खाका खींचा जा रहा है। इसमें गैरसैंण शहर से लेकर भराड़ीसैंण तक का क्षेत्र शामिल होगा।
यही नहीं, विधानसभा परिसर में मिनी सचिवालय के निर्माण के साथ ही गैरसैंण विकास परिषद के बजट में भी ठीकठाक प्रविधान किया गया है, ताकि वहां सुविधाएं विकसित हो सकें। सरकार का प्रयास यह है कि गैरसैंण को पहाड़ का ऐसा शहर बनाया जाए, जो सभी सुविधाओं से सुसज्जित हो।
स्मार्ट सिटी परियोजना के आकार लेने पर गैरसैंण में ग्रीष्मकाल में राजधानी संचालित होने की उम्मीद जगी है। यही नहीं, इससे गैरसैंण नगर पंचायत के उच्चीकरण की राह भी सुगम होगी।
इसके अलावा भराड़ीसैंण में पहाड़ की बदरी गाय का एक्सीलेंस सेंटर बनाने की दिशा में भी कदम बढ़ाए जा रहे हैं। इससे भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्र के बाद छायी रहने वाली वीरानी भी दूर होगी।









