
उत्तराखंड वन्यजीव संरक्षण में अग्रणी राज्य बन गया है, जहाँ 71.05% वन क्षेत्र वन्यजीवों के लिए स्वर्ग है। बाघ, हाथी और हिम तेंदुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, बाघ 14,000 फीट की ऊंचाई पर भी देखे गए हैं।
देहरादून। यह किसी से छिपा नहीं है कि वन्यजीव संरक्षण में उत्तराखंड महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। 71.05 प्रतिशत वन भूभाग वाला यह राज्य अब वन्यजीवों के लिए स्वर्ग से कम नहीं है।
वन्यजीव संरक्षण की दिशा में किए गए प्रयासों के फलस्वरूप यहां के जंगलों में बाघ, हाथी समेत दूसरे वन्यजीवों का कुनबा लगातार बढ़ रहा है।
और तो और पूर्व में 14 हजार फीट की ऊंचाई तक बाघों की मौजूदगी वहां लगे कैमरा ट्रैप में पुख्ता हुई है। इसके साथ ही उच्च हिमालयी क्षेत्र की शान कहे जाने वाले हिम तेंदुओं के संरक्षण की भी नई इबारत लिखी गई है।
अपनी समृद्ध जैवविविधता और प्रभावी संरक्षण नीतियों के फलस्वरूप उत्तराखंड वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में देश का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है।
अपनी भौगोलिक चुनौतियों को अवसर में बदलते हुए वन्यजीवों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार किया गया है। इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि राज्य में वन भूभाग का 16 प्रतिशत हिस्सा संरक्षित क्षेत्र के रूप में वन्यजीव संरक्षण को समर्पित किया गया है।
इसमें राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव विहार और संरक्षण रिजर्व हैं। इन संरक्षित क्षेत्रों के साथ-साथ आरक्षित वन क्षेत्रों में वन्यजीवों का कुनबा खूब पनप रहा है।
बाघों को ही देखें तो वर्ष 2003 की गणना में राज्य में इनकी संख्या 245 आंकी गई थी। वर्ष 2022 की गणना में यह आंकड़ा 560 पहुंच गया।
अब तो कार्बेट व राजाजी टाइगर रिजर्व समेत 13 वन प्रभागों से निकलकर बाघ उच्च हिमालयी क्षेत्रों की ओर भी कदम बढ़ा रहे हैं। पूर्व में 14 हजार फीट की ऊंचाई पर मध्यमेश्वर में लगे कैमरा ट्रैप में बाघ की मौजूदगी के प्रमाण मिले थे।
इसके अलावा अस्कोट समेत अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह बाघों की मौजूदगी के पुख्ता प्रमाण मिले। वर्तमान में जिस तरह का परिदृश्य है, उससे राज्य में इन दिनों चल रही बाघ गणना में इनकी संख्या 600 का आंकड़ा पार करने की उम्मीद जताई जा रही है।
इसी तरह यमुना से लेकर शारदा नदी तक फैले लगभग साढ़े छह हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में हाथियों का कुनबा बढ़ रहा है। वर्ष 2003 में राज्य में हाथियों की संख्या 1582 आंकी गई थी, जो वर्ष 2020 की गणना में 2026 पहुंच गई।
अब नई गणना में यह साफ होगा कि गजराज के कुनबे में और कितना इजाफा हुआ है। यही नहीं, उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हिम तेंंदुआ संरक्षण को भी कदम उठाए गए हैं।
वर्ष 2005 की गणना में हिम तेंदुओं की संख्या 30 थी, जो वर्ष 2022 में 124 हो गई। इसी तरह की तस्वीर दूसरे वन्यजीवों की भी है। यद्यपि, मानव-वन्यजीव संघर्ष की चुनौती भी बढ़ी है।
राज्य में संरक्षित क्षेत्र
- राष्ट्रीय उद्यान :- कार्बेट टाइगर रिजर्व, नंदादेवी, फूलों की घाटी, राजाजी टाइगर रिजर्व, गंगोत्री व गोविंद राष्ट्रीय उद्यान।
- वन्यजीव विहार :- मसूरी, केदारनाथ, गोविंद, अस्कोट, सोनानदी, बिनसर व नंधौर।
- संरक्षण रिजर्व :- आसन वेटलैंड, झिलमिल झील, पवलगढ़ व नैना देवी हिमालयी पक्षी संरक्षण रिजर्व।
प्रमुख वन्यजीव
- वन्यजीव, संख्या
- बाघ, 560
- गुलदार, 3115
- हाथी, 2026
- काला, भूरा व स्लोथ भालू, 2121
- हिम तेंदुआ, 124
5028.0249 वर्ग किमी क्षेत्रफल को समाहित किए हैं राष्ट्रीय उद्यान
2683.73 वर्ग किमी है वन्यजीव विहारों का क्षेत्रफल
21244.560 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले हैं चार संरक्षण रिजर्व









