
देहरादून में गर्मियों के साथ गैस सिलेंडर की किल्लत से पर्यटन कारोबार प्रभावित है। शहर से सहस्रधारा और रानी पोखरी तक कई गेस्ट हाउस व होम स्टे के किचन बंद हो गए हैं।
देहरादून। जनपद में गर्मियों के सीजन की शुरुआत के साथ ही गैस सिलेंडर की किल्लत ने कारोबारियों का तनाव बढ़ा दिया है। शहर से लेकर सहस्रधारा और रानी पोखरी तक कई गेस्ट हाउस और होम स्टे में चूल्हे की आंच ठंडी होने के कारण ताले लटक चुके हैं। आगे और भी बंद होने के कगार पर हैं।
दूसरी ओर छोटे रेहड़ी पटरी संचालक भी भारी मुसीबत में हैं, जिनके पास सिलेंडर की जगह अंगीठी या सुलगती लड़कियों ने ली है। बाहरी इलाकों में जंगल में सूखी लकड़ी बटरोने वालों की संख्या एकाएक बढ़ी है और जंगल में चोरी छिपे पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलने की शिकायतें भी आने लगी हैं।
कई गेस्ट हाउस के किचन बंद
सहस्रधारा में गेस्ट हाउस कारोबारी सुभाष त्यागी ने बताया कि यहां कई गेस्ट हाउस के किचन बंद हो चुके हैं। हमें रेस्टोरेंट बंद करना पड़ा है, अब सिर्फ गेस्ट हाउस के कमरों का सहारा है। गर्मियों का सीजन सिर पर है और हम खाली हाथ बैठे हैं। अगर खाने की सुविधा ही नहीं होगी तो इस बार धंधा बहुत धीमा चलेगा।
कई रेस्टोरेंट वाले घर से घरेलू सिलेंडर पर दाल-चावल बनाकर ला रहे हैं ताकि गेस्ट को खिला सकें। कारोबारी पीयूष चौधरी ने बताया कि गेस्ट हाउस के लिए कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल रहा है, घरेलू सिलेंडर से कब तक काम चलाएं, ऐसे में किचन बंद करनी पड़ी है। ग्राहकों को भी असुविधा हो रही है। वह खाने का सामान दूसरी जगहों से पैक करवा कर ला रहे हैं।
रेहड़ी पटरी वाले जंगलों से लकड़ियां बटोर कर अपनी अंगीठी सुलगा रहे हैं। सुद्धोवाला से लेकर कोटी तक जंगलों के बीच चोरी छिपे छोटे पेड़ या शाखाएं काटने की घटनाएं भी सुनने में आ रही हैं, जिस पर प्रशासन को नजर रखनी चाहिए।
मैं माता मंदिर के पास पिछले 15 दिनों से पेटीज की रेहड़ी लगा रहा हूं। सिलेंडर अब मिलता नहीं और ब्लैक में कीमतें आसमान छू रही हैं। मजबूरी में रेहड़ी पर लकड़ी भरकर लाना पड़ रहा है और उसी से पेटीज सेंक रहा हूँ। हालांकि लकड़ी का इंतजाम करना भी महंगा है, लेकिन ब्लैक में मिल रहे सिलेंडर के मुकाबले यह फिर भी सस्ती पड़ रही है। हम जैसे छोटे दुकानदारों के लिए अब धंधा बचाना मुश्किल हो गया है। – परवेज खान, पेटीज विक्रेता, पटेल नगर
गडूल में पांच से छह होम स्टे बंद हो गए हैं, बाकी कुछ कगार पर हैं। होम स्टे का काम लकड़ी पर नहीं चल सकता और सिलेंडर ब्लैक में जरूरत से ज्यादा महंगे हैं। हम भयंकर आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। – रवींद्र रावत, होम स्टे संचालक, रानीपोखरी
ग्राम वासी जो छोटे रेस्टोरेंट चला रहे हैं, वे लकड़ी जंगल से बीनकर ला रहे हैं और अपना काम खींच रहे हैं। रानी पोखरी में गैस सप्लाई बाधित होने से पूरा कारोबार प्रभावित हुआ है। – राजू मेहर स्थानीय निवासी, पंचायत गडूल









