
मोहन कांडपाल के ‘पानी बोओ पानी उगाओ’ अभियान को धर्मशाला में दलाई लामा की 86वीं वर्षगांठ पर आयोजित जल संरक्षण सम्मेलन में खूब सराहा गया।
(अल्मोड़ा)। ‘पानी बोओ पानी उगाओ’ अभियान के संयोजक और राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त मोहन कांडपाल के जल व पर्यावरण संरक्षण के कार्यों ने धर्मशाला (हिमाचलप्रदेश) में वाहवाही बटोरी है।
14वें दलाई लामा की पदवी पर आसीन होने की 86वीं वर्षगांठ पर तिब्बत पालिसी इंस्टीट्यूट की ओर से जल संरक्षण पर आयोजित सम्मेलन में मोहन कांडपाल के व्याख्यान को काफी सराहा गया।
बुद्धिजीवियों ने मौजूदा जल संकट के दौर में इस मुहिम को प्रेरणा के रूप में अपनाने की जरूरत भी बताई।
बीते 21 से 23 फरवरी तक चले इस सम्मेलन के आखिरी सत्र में जलमित्र मोहन कांडपाल ने पानी बोओ पानी उगाओ अभियान तथा इसके सामाजिक प्रभाव के बारे में व्याख्यान दिया।
कहा कि जल स्रोतों के पुनर्जीवन, वर्षा तथा पारंपरिक जल के संरक्षण के लिए जनभागीदारी सतत विकास के लिए प्रभावी माडल प्रस्तुत करती है।
तिब्बत पालिसी इंस्टीट्यूट सहित सम्मेलन में मौजूद विशेषज्ञों ने उनकी इस पहल को सराहनीय बताया। जलमित्र मोहन के अनुसार उन्होंने दलाई लामा से आत्मीय भेंट की।
जल संरक्षण व अन्य पहलुओं पर गहन चर्चा भी की। सम्मेलन में नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी, ट्रिमैन आफ इंडिया मारीमुथु योगनाथन, डा. रंजन कोत्रू, डा. लोबसांग यांग्त्सो सहित कई अन्य ने भी अपने अनुभव साझा किए।









