देवभूमि में भगवान शिव और माता पार्वती की विवाहस्थली त्रियुगीनारायण को अब सुनियोजित वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाएगा। ब्रिडकुल ने इसके लिए आर्किटेक्चरल डिजाइन और समग्र प्लानिंग का कार्य शुरू कर दिया है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलेगा।
देहरादून। देवभूमि में भगवान शिव और माता पार्वती की विवाहस्थली के रूप में प्रसिद्ध त्रियुगीनारायण अब आस्था व पर्यटन का नया संगम बनेगा। इसे सुव्यवस्थित वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने का कार्य ब्रिज, रोपवे, टनल एवं अन्य आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड (ब्रिडकुल) ने शुरू कर दिया है।
पूरे क्षेत्र का आर्किटेक्चरल डिजाइन और समग्र प्लानिंग के जरिये सुनियोजित विकास किया जाएगा। ब्रिडकुल के अनुसार, ऊखीमठ ब्लाक अंतर्गत स्थित त्रियुगीनारायण क्षेत्र के विकास के लिए पहले डिजाइन और प्लानिंग से जुड़ी कंसल्टेंसी सेवाएं ली जाएंगी।
आस्था की धुरी पर सजेगा डेस्टिनेशन
त्रियुगीनारायण की पहचान इसकी धार्मिक मान्यता से जुड़ी है। मान्यता है कि इसी स्थान पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। मंदिर परिसर में स्थित अखंड अग्नि इस पौराणिक विवाह की स्मृति का प्रमुख केंद्र है।
इसी आस्था के कारण देश के विभिन्न हिस्सों से लोग यहां विवाह संस्कार के लिए पहुंचते हैं। अब इसी धार्मिक पहचान को योजनाबद्ध पर्यटन और डेस्टिनेशन वेडिंग की अवधारणा से जोड़ने की तैयारी है।
क्षेत्र का समग्र विकास होने पर विवाह आयोजनों के साथ ठहरने, खानपान, स्थानीय परिवहन, सजावट, फोटोग्राफी और अन्य सेवाओं की गतिविधियां बढ़ेंगी। इसका सीधा लाभ स्थानीय कारोबार, होम स्टे और सेवा क्षेत्र को मिलेगा।
सबसे महत्वपूर्ण चरण डिजाइन व प्लानिंग
परियोजना में सबसे महत्वपूर्ण चरण डिजाइन व प्लानिंग का होगा। क्षेत्र की धार्मिक पहचान, पहाड़ी वास्तुशैली और प्राकृतिक परिवेश को ध्यान में रखते हुए यह तय किया जाना है कि भविष्य में यहां किस तरह की सुविधाएं विकसित हों।
पर्यटकों और विवाह समारोहों के लिए जरूरी आधारभूत ढांचा, आवागमन, ठहरने और अन्य सुविधाओं की रूपरेखा इसी चरण में तैयार होगी।
‘त्रियुगीनारायण के सुनियोजित विकास की दिशा में काम किया जा रहा है। डिजाइन और प्लानिंग के बाद परियोजना को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि त्रियुगीनारायण को एक सुव्यवस्थित विवाह पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के साथ स्थानीय लोगों के लिए आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर भी तैयार किए जा सकें।’
राजेश चंद्र शर्मा, प्रबंध निदेशक, ब्रिडकुल