Big Breaking:-कांग्रेस के हंगामे के कारण डेढ़ घंटे तक सदन रहा स्थगित

कांग्रेस ने उत्तराखंड विधानसभा में अपनी आवाज दबाने और नियम 58 के तहत कम प्रस्ताव स्वीकार करने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। इसके चलते सदन को पांच बार स्थगित करना पड़ा।

देहरादून। कांग्रेस ने पीठ पर कांग्रेसी विधायकों की आवाज दबाने का आरोप लगाते हुए सदन में हंगामा किया। स्थिति यह बनी कि सदन पांच बार स्थगित करना पड़ा। इस बीच कांग्रेस व भाजपा विधायकों के बीच तीखी नोक-झोंक भी हुई।

यद्यपि, इसके बाद विपक्षी विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष के कक्ष में जाकर उनसे मुलाकात की। इसके बाद सदन दोबारा सुचारू रूप से संचालित हुआ।

सदन में दोपहर बाद पीठ ने नियम 58 की ग्राह्यता पर चर्चा करने के लिए मिले विषयों में से पांच विषयों को चुना तो कांग्रेस ने हंगामा शुरू कर दिया।

कांग्रेस विधायकों का आरोप था कि उनकी ओर से कई प्रस्ताव रखे गए थे लेकिन पीठ ने केवल पांच को ही चर्चा के लिए स्वीकार किया है यह सदन की परंपरा के खिलाफ है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सदन में कांग्रेसी विधायकों की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। यहां तक कि उन्होंने पीठ पर सरकार के दबाव में काम करने तक का आरोप लगाया।

इसके बाद सभी कांग्रेसी विधायक पीठ के समक्ष आकर नारेबाजी करने लगे। पीठ ने स्पष्ट किया कि नियमानुसार केवल पांच प्रस्तावों को ही आवेदन के लिए स्वीकार किया जा सकता है ।

पीठ पहले ही उनके कानून-व्यवस्था के सवाल को नियम 58 की ग्राह्यता पर सुनने की सहमति दे चुकी है, लेकिन कांग्रेसी विधायक इस बात को नहीं मानें।

इस पर शाम पांच बजे विधानसभा अध्यक्ष ने सदन 15 मिटन के लिए स्थगित कर दिया गया। 15 मिनट बाद जब सदन की कार्रवाई शुरु हुई तो कांग्रेसी विधायकों ने फिर हंगामा किया। इस पर 5.30 पर सदन फिर से स्थगित किया गया।

इस बीच सत्ता पक्ष ने गतिरोध तोड़ने के लिए विपक्षी विधायकों से बात शुरू की। यद्यपि, इस बीच सदन तीन बार और स्थगित किया गया।

इसके बाद कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, प्रीतम सिंह और विधायक हरीश धामी को लेकर विधानसभा अध्यक्ष के पास पहुंचे।

यहां संसदीय कार्यमंत्री सुबोध उनियाल पहले से ही मौजूद थे। यहां हुई वार्ता के बाद कांग्रेसी विधायक दोबारा अपने स्थान पर पहुंचे और सदन की कार्रवाई शुरू हुई।

कांग्रेसियों ने विस परिसर में दिया धरना

कांग्रेस के विधायक सुबह सत्र की कार्रवाई शुरू होने से पहले विधानसभा परिसर में धरने पर बैठे।

इस दौरान उन्होंने आइसीबीटी हल्द्वानी का निर्माण शुरू कराने, खटीमा बग्घा को राजस्व ग्राम घोषित करने, दूसरे राज्यों के व्यक्तियों के राज्य में प्रमाण पत्र बनने व अल्पसंख्यक अत्याचार से संबंधित नारे लिखी पटिट्काएं पकड़ी हुई थी। सदन की कार्रवाई शुरू होने पर उन्होंने अपना धरना समाप्त किया।

धरने में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, उप नेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी, हरीश धामी, सुमित हृदयेश, तिलकराज बेहड, मदन बिष्ट व अनुपमा रावत आदि शामिल रहे।

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