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Big Breaking:-देहरादून में तिब्बती समुदाय का चीन विरोधी प्रदर्शन: ‘फ्री तिब्बत’ के नारे गूंजे

देहरादून में 67वें राष्ट्रीय तिब्बती महिला विद्रोह दिवस पर तिब्बती समुदाय ने चीन के खिलाफ विशाल रैली निकाली।

देहरादून। राष्ट्रीय तिब्बती महिला विद्रोह दिवस की 67वीं वर्षगांठ पर दून में तिब्बती समुदाय ने चीन के विरोध में रैली निकाली। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से तिब्बतियों को रिहा करने की मांग की।

मंगलवार को परेड ग्राउंड से शुरू हुई रैली में तिब्बतन सेटलमेंट, रीजनल तिब्बतन फील्ड मूवमेंट, रीजनल तिब्बतन यूथ कांग्रेस की विभिन्न तिब्बती शाखाओं के पदाधिकारी, सदस्य व छात्र-छात्राएं शामिल हुए।

हाथों में तख्तियां और झंडे लिए तिब्बती समाज की महिलाओं ने जय भारत, जय तिब्बत, यूएनओ तिब्बत बचाओ, दलाई लामा की जय, तिब्बत पर कब्जा बंद करो, तिब्बत में न्याय चाहिए, फ्री तिब्बत, तिब्बती की आजादी भारत की सुरक्षा, तिब्बत हमारा है चीन इसे छोड़ो, के नारे लगाए।

रैली बुद्धा चौक, दून अस्पताल चौक, दर्शनलाल चौक से वापस परेड ग्राउंड में आकर संपन्न हुई। तिब्बती महिलाओं ने बताया कि मार्च 1959 को तिब्बत की राजधानी ल्हासा में पोटाला पैलेस के सामने एकत्र तिब्बती महिला संगठन की महिलाओं पर चीन सरकार ने दमनकारी रवैया अपनाया।

तिब्बतन सेटलमेंट के देहरादून आफिसर्स त्सेवांग फुंटसोक ने कहा कि 12 मार्च 1959 को तिब्बती महिलाओं ने चीन के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किया था। तब से यह सिलसिला लगातार जारी है।

कहा कि चीन का तिब्बत में जबरन बड़े बांध और पर्यावरणीय गतिविधि से बड़े पैमाने पर पर्यावरण प्रदूषित हुआ है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस मुद्दे को गंभीरता से लेकर और तिब्बत संकट हल करे। इस मौके पर नगवांग, लोबसांग, आरटी, डब्ल्यूए, कार्क, लोबसांग आदि मौजूद रहे।

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