पिथौरागढ़ में 14 वर्षीय बेटे की दौड़ते समय मौत के सदमे से मां ने सरयू नदी में कूदकर जान दे दी। इस हृदयविदारक घटना से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।
पिथौरागढ़। जिला मुख्यालय से करीब 15 किमी दूर मड़े गांव निवासी कक्षा 9 पढ़ने वाले 14 वर्षीय बच्चे की सुबह दौड़ते समय मौत हो गई। इकलौते पुत्र की मौत के सदमे में मां ने सरयू नदी में कूद मार कर जान दे दी। घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।
घटना जिला मुख्यालय से लगभग 15 किमी दूर मड़ेगांव की है। जतिन जोशी (14) पुत्र कैलाश चंद्र जोशी प्रतिदिन की तरह झौलखेत मैदान में दौड़ते हुए घर को लौट रहा था रास्ते में अचानक गिर कर बेहोश पड़ गया। उसी समय पीछे से अन्य बच्चे भी दौड़ कर आ रहे थे।
बेटे की मौत लगा गहरा सदमा
उन्होंने जतिन को गिरा देखा तो सूचना उसकी मां पूनम जोशी उर्फ़ पुष्पा को दी ने उसके घर पर सूचना दी। मां पूनम जोशी टैक्सी वाहन से जिला जतिन को अस्पताल लेकर आई। यहां चिकित्सकों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। मां को बेटे की मौत का सदमा सहन नहीं कर सकी। वह अस्पताल से कपड़े से मुंह ढककर देवसिंह स्थित पार्किंग से गंगोलीहाट जाने वाले टैक्सी वाहन में बैठी।
टैक्सी से वह 30 किमी दूर घाट पहुंची। जहां पर घाट पुल से 100 मीटर आगे टैक्सी चालक से कुछ सामान लेने की बात कही। वह अचानक टैक्सी से उतरी और सीधे सरयू नदी में छलांग मार दी। यहां होटल स्वामी ने उसे बचाने के लिए छलांग लगाई। लेकिन वह उसे बचा नहीं पाए।
घटना की जानकारी वड्डा कस्बे और पिथौरागढ़ नगर में रहने वाले स्वजनों को मिली तो उन्होंने पुलिस को महिला के घाट की तरफ जाने की बात बताते हुए उसे रोकने की मांग की लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। घाट पुलिस चौकी से महिला का शव मिलने की सूचना मिली |पुलिस ने मृत महिला की फोटो भेजी तो पूनम की मौत की पुष्टि हो गई।
पुलिस ने महिला के शव को नदी से निकालकर पिथौरागढ़ को ला रही है। यह परिवार मूल रुप से पिथौरागढ़ तहसील के गुरुंगतोली का है। वर्तमान में वड्डा कस्बे के निकट मड़े गांव में रहता है।
मृतका कर पति कैलाश चंद्र जोशी असम राइफल में त्रिपुरा में तैनात हैं। एक दो वर्ष पूर्व जतिन की बड़ी बहन की मधुमेह से मृत्यु हुई थी। इधर जतिन की मौत से मां इस कदर सदमे में आई कि डाक्टरो द्वारा पुत्र को मृत घोषित करते ही उसने अपनी जीवन लीला समाप्त करने का निर्णय लिया। इस घटना से पूरे क्षेत्र में शोक व्याप्त है।
परिवार का कोई सदस्य साथ होता तो बच जाती पूनम
सुबह पूनम जिस समय अपने बच्च को अस्पताल लेकर के आई उस समय यदि परिवार के कुछ सयाने सदस्य साथ होते तो अभी पूनम का जीवन बच जाता। सुबह जब पुत्र सड़क पर बेहोशी की हालत में मिला तो उसकी माता अपनी सुध बुध खो बैठी और इसकी सूचना उसने अपने किसी भी निकटवर्ती परिजन को नहीं दी।
बेहोश पुत्र को सीधे टैक्सी में बैठ कर सीधे अस्पताल पहुंच गई। अस्पताल में जैसे ही चिकित्सक ने जतिन को मृत बताया तो उसकी मां पूनम उर्फ पुष्पा अपनी होश खो बैठी। ऐसे वक़्त सभालने और ढाढस दिलाने के लिए कोई निकटवर्ती स्वजन या कोई अन्य व्यक्ति चाहिए जो उसे सभालता और उसे इस तरह का आत्मघाती कदम उठाने से बचा लेता।
मां और बेटे के जाने के बाद इस समय घर में कोई नहीं है। मृतका की बड़ी पुत्री इस समय कहीं बाहर है और पति त्रिपुरा में ड्यूटी में है। घर में रहने वाली माता और पुत्र चले जाने से घर बंद पड़ा है।