उत्तराखण्ड

Big Breaking:-मां नंदा देवी बड़ी जात: वाण गांव में धर्म भाई लाटू देवता से हुआ मिलन, छलछलाई श्रद्धालुओं की आंखें

मां नंदा की बड़ी जात यात्रा कनोल से वाण पहुंची, जहां उनका धर्म भाई लाटू देवता से मिलन हुआ। मां राजराजेश्वरी का भी नंदा डोली से मिलन हुआ, जिससे भक्तों की आंखें नम हो गईं और पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया।

गोपेश्वर। हिमालय की अधिष्टात्री देवी मां नंदा की बड़ी जात यात्रा कनोल से चलकर वाण पहुंची। यहां पर मां नंदा के धर्म भाई लाटू देवता का मंदिर है। मां नंदा व राजराजेश्वरी मां का पांच सितंबर को कुरूड़ से चलने के बाद यहां पर मिलन हुआ।

देव डोलियों के मिलन का दृश्य देखकर भक्तों की आंखे छलछला गयी। वाण गांव में ग्रामीणों नें पौराणिक लोकगीतों और जागरों के साथ मां नंदा का स्वागत किया। इस दौरान धर्म भाई लाटू देवता ने भी यात्रा में शामिल देव डोलियों को आर्शिवाद दिया।

वाण गांव में मां नंदा देवी की बड़ी जात यात्रा में शामिल होने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं। दो दिन के प्रवास के बाद सुबह पूजा अर्चना कर मां नंदा की बड़ी जात में शामिल देवी देवताओं को कनोल गांव से विदा किया गया। इस दौरान ननौ किमी पैदल यात्रा कर बड़ी जात यात्रा वाण गांव पहुंची।

वाण गांव में नंदा देवी चौक में बड़ी जात में कुरूड दशोली की नंदा डोली, बंड की नंदा डोली, ल्वाणी की ज्वाल्पा देवी की डोली, बंड भूमियाल की छंतोली, गेदाणु देवता की छंतोली सहित अन्य देव डोलियां के वाण गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने लोक जागरों के माध्यम से स्वागत किया, बधाण भ्रमण कर मां राज राजेश्वरी की डोली भी नंदा चौक पहुंची तो बहनों के मिलने का द़ृष्य सबको भाव विभोर कर रहा था।

मां नंदा की इस यात्रा में जिस प्रकार श्रद्धालुओं हूजूम उमड़ पड़ा है उससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया है। वाण गांव के लोग अतिथि देवों भवों को चरितार्थ कर लोगों की सेवा में जुटे हैं। वाण गांव में मां नंदा के भाई लाटू का मंदिर है। जहां सुबह नंदा देवी , राजराजेश्वरी सहित अन्य देव डोलियां मंदिर में जाकर भाई का आवाहन करेगी । इसके बाद ही लाटू देवता आगे की यात्रा के लिए अनुमति देकर अगुवाई करेंगे। इस यात्रा में वाण से आगे निर्जन पड़ाव हैं। मां नंदा देवी बड़ी जात यात्रा कल आज वाण से चलकर गैरोलीपालत पहुंचेगी।

राजराजेश्वरी मां का मां नंदा सहित अन्य देवी देवताओं से मिलन

लोक जात यात्रा के तहत राजराजेश्वरी मां की यात्रा सुबह मुंदोली से चलकर वाण गांव पहुंची। इस दौरान मां राजराजेश्वरी के धर्म भाई बाला द्यौसिंह देवता के जन्मस्थान मुन्दोली में परिक्रम कर आगे की यात्रा की अनुमति ली गई।

बाला द्यौसिंह देवता ने अवतरित होकर मां राजरोजश्वरी को आगे की यात्रा का मार्ग प्रसस्त किया और श्रद्धालुओं को आर्शिवाद दिया। इसके बाद यात्रा लोहाजंग गांव में नंदा चौक पहुंची इस दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ लगी थी। श्रद्धालुओं ने मां राजराजेश्वरी की पूजा कर यात्रा में शामिल होकर वाण पहुंचे।

उल्लेखनीय है कि बाला द्यौसिंह देवता, लाटू देवता की तरह ही युगों-युगों से मां नंदा देवी यात्रा में अगवान (पथ प्रदर्शक) की भूमिका निभाते आ रहे हैं। द्यौसिंह देवता का जन्मस्थान मुन्दोली गांव है, जबकि वर्तमान में वे सुतोल गांव में भूमि के देवता यानी ”भूमियाल” के रूप में पूजे जाते हैं।

परंपरा के अनुसार, द्यौसिंह देवता, लाटू देवता की उपस्थिति के बिना कैलाश मार्ग की कठिन यात्रा को सुगम नहीं माना जाता। यह यात्रा लोक संस्कृति, भाई-बहन के पवित्र रिश्ते और अटूट आस्था की मिसाल बनकर आगे बढ़ रही है।

लोहा जंग में मां राजरोजश्वरी के दर्शन के लिए ग्राम पंचायत पिनाउ , घैस , बलाण , सुया , बानुड़ी की महिलाओं सहित कुमाउ से आए भक्तों ने लोक जागर गाकर मां को विदा किया। कल आज नंदा देवी लोक जात यात्रा वाण से चलकर अगले पड़ाव में गैरालीपातल रात्रि पहुंची ।

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