उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी के चलते 44 हजार से अधिक विद्यार्थी आज भी फर्श पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
देहरादून। सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं को लेकर सड़क से सदन तक सवाल उठ रहे हैं। इसकी एक बड़ी वजह विद्यालयों में फर्नीचर की कमी भी है।
उत्तराखंड में केंद्र से पिछले पांच साल में समग्र शिक्षा योजना के तहत 2617.16 करोड़ रुपये मिलने के बावजूद हजारों विद्यार्थियों को डेस्क-बेंच नसीब नहीं हो पा रहे हैं। प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में करीब 44,085 छात्र-छात्राएं आज भी फर्श पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। खासकर पहाड़ी और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यालयों में यह समस्या गंभीर बनी हुई है।
माध्यमिक विद्यालयों में अधिक है संख्या
शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, माध्यमिक विद्यालयों में करीब 26,835 विद्यार्थियों के लिए फर्नीचर की आवश्यकता है। वहीं, प्राथमिक विद्यालयों में लगभग 17,250 विद्यार्थियों के पास बैठने के लिए पर्याप्त डेस्क-बेंच उपलब्ध नहीं हैं। इस तरह दोनों स्तर के विद्यालयों में कुल 44,085 विद्यार्थी प्रभावित हैं। माध्यमिक स्तर पर जरूरत अधिक होने के कारण यहां फर्नीचर की व्यवस्था करना विभाग के लिए बड़ी चुनौती है।
सबसे अधिक टिहरी जनपद में बदहाल व्यवस्था
जिलेवार स्थिति के अनुसार, टिहरी जिले में सबसे अधिक 1,195 विद्यालयों में फर्नीचर की कमी बताई गई है। वहीं, पिथौरागढ़ जिले में ऐसे विद्यालयों की संख्या 365 है, जो सबसे कम है।
शिक्षा विभाग का कहना है कि विद्यार्थियों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। एक अप्रैल, 2026 से शुरू हुए नए शैक्षणिक सत्र में भी शत-प्रतिशत फर्नीचर उपलब्ध कराने का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया है।
विद्यालयों से समय पर नहीं आती मांग
प्रदेश में 11,360 प्राथमिक विद्यालय और 2,259 माध्यमिक व इंटर कालेज हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, कई विद्यालयों के प्रधानाध्यापक, प्रधानाचार्य और शिक्षक फर्नीचर की जरूरत के संबंध में समय पर मांग नहीं भेजते।
जिला शिक्षा अधिकारी या मुख्य शिक्षा अधिकारी के माध्यम से निदेशालय तक मांगपत्र पहुंचने में भी देरी होती है। विद्यालयों से समय पर मांग नहीं मिलने के कारण फर्नीचर की व्यवस्था प्रभावित होती है। ऐसे में विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों को भी क्षतिग्रस्त फर्नीचर बदलने तथा नई जरूरतों की जानकारी समय पर उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी निभानी होगी।
सभी सरकारी विद्यालयों में फर्नीचर समेत आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं। कुछ स्थानों पर कुर्सी-मेज क्षतिग्रस्त होने के कारण कमी की स्थिति बनती है। प्रत्येक शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में मांग के अनुसार विद्यालयों को फर्नीचर उपलब्ध कराया। बुनियादी सुविधाओं के लिए धन की कोई कमी नहीं है।’



