हाई कोर्ट ने मेरुदंड की विकृति, रीढ़ की चोट व स्नायु तंत्र की बीमारी को लोकोमोटर दिव्यांगता की उप-श्रेणी में शामिल कर भर्ती में क्षैतिज आरक्षण देने का आदेश दिया है।
नैनीताल। हाई कोर्ट ने मेरुदंड की विकृति, रीढ़ की चोट व स्नायु तंत्र की बीमारी को लोकोमोटर दिव्यांगता की उप-श्रेणी में शामिल कर भर्ती में क्षैतिज आरक्षण देने के संबंध में महत्वपूर्ण आदेश दिया है।
न्यायाधीश न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने मनोज सिंह कंडारी की याचिका का निस्तारण करते हुए राज्य सरकार को 31 अगस्त 2026 के यूकेएसएसएससी भर्ती विज्ञापन के लिए संबंधित विभाग अपने अध्याचन में आवश्यक संशोधन करने और संशोधित अध्याचन आयोग को भेजने के निर्देश सरकार को दिए हैं।
याचिकाकर्ता का कहना था कि केंद्र सरकार ने 24 अगस्त 2022 की अधिसूचना के माध्यम से स्पाइनल डिफॉर्मिटी और स्पाइनल इंजरी को लोकोमोटर दिव्यांगता की नई उप-श्रेणी के रूप में शामिल किया था।
इसके बाद राज्य सरकार ने भी 11 फरवरी 2026 के शासनादेश के जरिए इसे मान्यता दी। इसके बावजूद यूकेएसएसएससी के 31 अगस्त 2026 के ग्रुप-सी भर्ती विज्ञापन में इस श्रेणी को आरक्षण में शामिल नहीं किया गया।
कोर्ट ने आदेश दिया कि संबंधित विभाग 15 दिन के भीतर आवश्यक पहचान और संशोधन की प्रक्रिया पूरी कर संशोधित अध्याचन यूकेएसएसएससी को भेजें। तब तक आयोग 31 अगस्त के विज्ञापन पर आगे की कार्रवाई नहीं करेगा। संशोधित अध्याचन मिलने के बाद आयोग को आवश्यक शुद्धिपत्र जारी कर नई दिव्यांग श्रेणी को शामिल करना होगा।



