उत्तराखंड में सेब, कीवी और ड्रैगन फ्रूट उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए अब क्लस्टर आधारित खेती पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसके साथ ही फलोत्पादन के लिए उत्पादन से लेकर कोल्ड स्टोरेज, परिवहन, मार्केटिंग और प्रोसेसिंग तक की सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
देहरादून। उत्तराखंड में सेब, कीवी और ड्रैगन फ्रूट उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए अब क्लस्टर आधारित खेती पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसके साथ ही फलोत्पादन के लिए प्रदेश में ऐसा इको सिस्टम विकसित किया जाएगा, जिसमें उत्पादन से लेकर कोल्ड स्टोरेज, परिवहन, मार्केटिंग और प्रोसेसिंग तक की सुविधाएं उपलब्ध हों। मंगलवार को मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई बैठक में इस संबंध में निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों से जनपदों में वर्तमान में हो रही फसलों की जानकारी ली और किसानों से नियमित फीडबैक लेकर उनकी समस्याओं का निदान कर सुझावों पर अमल करने को कहा। उन्होंने कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में कहीं सुधार की आवश्यकता हो तो जिलाधिकारी लिखित सुझाव दें। साथ ही निर्धारित अवधि के लिए उत्पादन क्षेत्र और उत्पादकता बढ़ाने के लक्ष्य भी तय करें। इसके लिए कृषि विज्ञान केंद्रों का अधिकाधिक उपयोग करने के निर्देश दिए गए।
नई फसलों से बदलने की जरूरत
उन्होंने सेब और कीवी की सघन खेती को बढ़ावा देने के लिए नई और गुणवत्तापूर्ण किस्मों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। साथ ही नए क्षेत्रों को फलोत्पादन से जोड़ने, उच्च घनत्व वाली अत्याधुनिक नर्सरियां विकसित करने और कम उत्पादकता वाले पुराने क्षेत्रों को भी अधिक उत्पादन देने वाली नई फसलों से बदलने की जरूरत बताई।
मुख्य सचिव ने कहा कि नए विकसित क्षेत्रों में फलोत्पादन शुरू होने तक किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए इंटर क्रापिंग को बढ़ावा दिया जा सकता है। पालीहाउस स्थापना के लिए प्रत्येक जिले में तीन-तीन वेंडर्स को सूचीबद्ध किया गया है।
किसानों को योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए विभागीय स्तर पर हैंड होल्डिंग करने के निर्देश भी उन्होंने दिए। बैठक में प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव शैलेश बगौली, एसएन पांडेय, राजेंद्र कुमार सहित दोनों मंडलों के आयुक्त और जिलाधिकारी मौजूद रहे।