दून की बेटी स्क्वाड्रन लीडर वैशाली भंडारी ने नौ महिला अधिकारियों के साथ 10 महीने में 25,500 नॉटिकल मील की विश्व समुद्री परिक्रमा पूरी की। यह तीनों सेनाओं का पहला संयुक्त महिला नौकायन अभियान है, जिसने भारत की समुद्री क्षमता और महिला शक्ति का प्रदर्शन किया।
देहरादून। दून की बेटी ने समुद्र की उन लहरों को पार किया है, जिन्हें दुनिया के सबसे कठिन समुद्री मार्गों में गिना जाता है। भारतीय वायुसेना की स्क्वाड्रन लीडर वैशाली भंडारी तीनों सेनाओं की नौ महिला अधिकारियों के उस दल में शामिल रहीं, जिसने पहली बार संयुक्त रूप से विश्व समुद्री परिक्रमा पूरी की।
स्वदेशी नौका आईएएसवी त्रिवेणी पर 10 महीने से अधिक समय तक चले इस अभियान में दल ने 25,500 नाटिकल मील यानी करीब 47 हजार किलोमीटर की दूरी तय की।
11 सितंबर 2025 को मुंबई से शुरू हुआ अभियान 22 जुलाई 2026 को मुंबई लौटकर पूरा हुआ। हिंद महासागर, प्रशांत महासागर और दक्षिण अटलांटिक की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच दल ने ऑस्ट्रेलिया के फ्रेमैंटल, न्यूजीलैंड के लिटलटन, अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स और दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन में पड़ाव किए। यह दुनिया में किसी देश का पहला त्रि-सेवा महिला नौकायन अभियान है।
भू मध्य रेखा से केप हार्न तक
करीब दस महीने के सफर में दल ने भूमध्य रेखा को दो बार पार किया। केप लीविन और केप हार्न जैसे कठिन समुद्री क्षेत्रों को पार करने के बाद टीम ड्रेक पैसेज से गुजरी। इसके बाद केप अगुलहास को पार करते हुए केप आफ गुड होप का चक्कर लगाया।
रोरिंग फोर्टीज, फ्यूरियस फिफ्टीज और स्क्रीमिंग सिक्सटीज में तेज हवाओं और ऊंची लहरों के बीच नौका को आगे बढ़ाना अभियान की सबसे कठिन चुनौतियों में रहा। लंबे समय तक समुद्र में रहना, बदलते मौसम के अनुसार फैसले लेना और सीमित संसाधनों में टीम के साथ तालमेल बनाए रखना दल के प्रशिक्षण और धैर्य की परीक्षा रहा।
पहली बार तीनों सेनाओं की महिला अधिकारी साथ
अभियान में भारतीय सेना की चार, नौसेना की एक और वायुसेना की चार महिला अधिकारी शामिल थीं। तीनों सेनाओं की महिला अधिकारियों का इस तरह संयुक्त रूप से विश्व समुद्री परिक्रमा करना अपने आप में ऐतिहासिक है।
अभियान ने यह भी दिखाया कि महिलाओं की भूमिका अब सैन्य सेवाओं के पारंपरिक दायित्वों तक सीमित नहीं है। कठिन और चुनौतीपूर्ण अभियानों में भी वे समान क्षमता के साथ जिम्मेदारी निभा रही हैं।
दून से निकलीं, वायुसेना तक पहुंचीं
वैशाली भंडारी का यह सफर दून से शुरू हुआ। उन्होंने डालनवाला स्थित दून इंटरनेशनल स्कूल और केंद्रीय विद्यालय ओएनजीसी, कौलागढ़ से पढ़ाई की। इसके बाद डीएवी पीजी कॉलेज से स्नातक किया। कॉलेज के दौरान एनसीसी प्रशिक्षण लिया, जिसने उनके व्यक्तित्व में अनुशासन और सैन्य जीवन की समझ विकसित करने में भूमिका निभाई।
स्नातक के बाद उन्होंने हैदराबाद स्थित वायुसेना अकादमी में प्रशिक्षण लिया और भारतीय वायुसेना की अकाउंट्स शाखा में अधिकारी के रूप में कमीशन प्राप्त किया। अब विश्व समुद्री परिक्रमा जैसे अभियान का हिस्सा बनकर उन्होंने अपने सैन्य करियर में एक उल्लेखनीय अध्याय जोड़ा है।
समुद्र के साथ भारत का संदेश भी पहुंचा
अलग-अलग देशों में हुए पड़ावों के दौरान अभियान ने भारत की समुद्री क्षमता और महिला शक्ति को दुनिया के सामने रखने का अवसर दिया। इसे समुद्री जागरूकता बढ़ाने और भारत की साफ्ट डिप्लोमेसी के लिए भी महत्वपूर्ण माना गया। 22 जुलाई को मुंबई लौटे दल का रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्वागत किया।
वैशाली की उपलब्धि देहरादून के लिए गौरव का विषय है। दून से शुरू हुआ सफर एनसीसी और वायुसेना अकादमी से होते हुए दुनिया के कठिनतम समुद्री मार्गों तक पहुंचा। उनकी कहानी यह बताती है कि बड़ा लक्ष्य चुनने के लिए सबसे पहले अपने भीतर की सीमाओं को पार करना पड़ता है।