Big Breaking:-Dehradun का ड्रेनेज प्लान ‘डूबा’, चुनिंदा इलाकों की लगेगी ‘नैया पार’

दून का 4000 करोड़ का मास्टर ड्रेनेज प्लान बजट के अभाव में अटका हुआ है, जिससे पूरे शहर को व्यापक राहत नहीं मिल पा रही है।

देहरादून। हर साल बारिश में जलभराव की मार झेलने वाले दून शहर को फिलहाल व्यापक राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। बहुप्रतीक्षित मास्टर ड्रेनेज प्लान एक बार फिर बजट के फेर में फंस गया है।

करीब 4000 करोड़ रुपये की लागत वाली डीपीआर को अब तक शासन की मंजूरी नहीं मिल पाई है, जिससे पूरे शहर में समग्र ड्रेनेज सिस्टम विकसित करने की योजना अधर में लटक गई है। फिलहाल शहर के कोर एरिया गांधी रोड के ड्रेनेज प्लान पर काम किया जा रहा है।

दून में जलभराव की स्थिति को देखते हुए फिलहाल शहर के अधिक प्रभावित इलाकों में ही ड्रेनेज सुधार का काम किया जाएगा। पहले चरण में दो प्रमुख योजनाएं प्रस्तावित हैं, जिसमें पहली दर्शनलाल चौक से प्रिंस चौक, सहारनपुर चौक होते हुए पटेलनगर तक और दूसरी राजेश्वरी कालोनी क्षेत्र के जल निकासी की है। इन दोनों परियोजनाओं की डीपीआर शासन को भेजी जा चुकी है और स्वीकृति का इंतजार है।

सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता पुरूषोत्तम कौशिक के अनुसार, फिलहाल गांधी रोड-सहारनपुर रोड और राजेश्वरी कालोनी की योजनाओं पर काम प्रस्तावित है। अन्य योजनाएं प्रशासन और आयुक्त कार्यालय से होते हुए शासन को भेजी जाएंगी, जहां से अंतिम स्वीकृति मिलेगी। सिंचाई विभाग को मुख्य मार्गों पर ड्रेनेज सिस्टम विकसित करने की जिम्मेदारी दी गई है। योजना के तहत वर्षाजल निकासी के लिए तीन हिस्सों में सिस्टम तैयार किया जाएगा, ताकि पानी की निकासी व्यवस्थित हो सके।

हर बारिश में खुलती है पोल
दून शहर का ड्रेनेज सिस्टम हर वर्ष बारिश में फेल साबित होता है। खासकर प्रिंस चौक, रेलवे स्टेशन के आसपास, आइएसबीटी, बंजारावाला, रिस्पना पुल, पलटन बाजार, गांधी रोड, त्यागी रोड और कचहरी रोड जैसे इलाकों में जलभराव आम समस्या बन चुकी है। पिछले साल भी भारी बारिश में प्रिंस चौक से रेलवे स्टेशन तक हालात बदतर हो गए थे, जिससे प्रशासन को आलोचना झेलनी पड़ी थी।

प्रस्तावों का दबाव और बजट बना बाधा
सूत्रों के अनुसार, देहरादून के अलावा अन्य जनपदों से भी बड़ी संख्या में ड्रेनेज योजनाओं के प्रस्ताव शासन को मिले हैं। ऐसे में भारी बजट और प्राथमिकताओं के दबाव के चलते दून का मास्टर प्लान फिलहाल ठंडे बस्ते में चला गया है।

बरसात से पहले तैयारी अधूरी
जून से शुरू होने वाले मानसून से पहले शहर में ड्रेनेज की स्थिति सुधरने के आसार कम हैं। कई इलाकों में अभी तक ठोस काम नहीं हो पाया है, जिससे इस बार भी लोगों को जलभराव की समस्या झेलनी पड़ सकती है।

शहर में 59 बड़े नाले हैं, जिनकी नियमित सफाई बड़ी चुनौती बनी हुई है। नगर निगम ने सफाई अभियान शुरू जरूर किया है, लेकिन हर साल बारिश में इसकी हकीकत सामने आ जाती है।

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