Big Breaking:-दून विश्वविद्यालय का हिंदू अध्ययन केंद्र भारतीय ज्ञान परंपरा को देगा नई गति, Cabinet ने छह पद किए स्वीकृत

कैबिनेट ने दून विश्वविद्यालय के हिंदू अध्ययन केंद्र के लिए छह पद सृजित करने की मंजूरी दी है। यह केंद्र युवाओं में भारतीय ज्ञान परंपराओं की गहरी समझ विकसित करेगा। 2025-26 सत्र से एमए हिंदू अध्ययन पाठ्यक्रम शुरू हो चुका है,

जिसमें भारतीय दर्शन और संस्कृति का गहन अध्ययन कराया जा रहा है। यह बीएचयू के बाद देश का दूसरा प्रमुख हिंदू अध्ययन केंद्र है, जो आधुनिकता और परंपरा को जोड़ता है।

देहरादून। युवाओं में भारतीय ज्ञान परंपराओं की समझ को गहराई देने के उद्देश्य से गठित दून विश्वविद्यालय का हिंदू अध्ययन केंद्र आने वाले समय में और गति पकड़ेगा।

कैबिनेट ने हिंदू अध्ययन केंद्र के लिए छह पद सृजित करने की मंजूरी दी है। हिंदू अध्ययन केंद्र में एक-एक पद प्रोफेसर एवं एसोसिएट प्रोफेसर, दो पद असिस्टेंट प्रोफेसर, एक-एक पद आउटसोर्स के माध्यम से कनिष्ठ सहायक और परिचारक के भरे जाएंगे।

दून विवि का यह केंद्र भारतीय दर्शन, इतिहास, साहित्य, समाजशास्त्र, कला और वास्तुकला जैसे क्षेत्रों में अध्ययन, अनुसंधान और प्रशिक्षण के लिए एक बहुविषयक ढांचा बनकर उभरा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने की घोषणा

अक्टूबर 2024 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घोषणा की थी कि दून विवि में हिंदू अध्ययन केंद्र स्थापित किया जाएगा, जो भारतीय आध्यात्मिक और दार्शनिक परंपराओं के संरक्षण, विश्लेषण और प्रसार के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य करेगा।

उन्होंने आगे कहा था कि यह केंद्र हिंदू परंपराओं, शास्त्रों और दर्शन की समझ को प्रोत्साहित करेगा, साथ ही शिक्षण और अनुसंधान के लिए भारतीय अनुसंधान पद्धतियों को बढ़ावा देगा।

यह केंद्र भारतीय ज्ञान परंपराओं पर आधारित बहुविषयक शिक्षा भी प्रदान करेगा, जिससे छात्रों में नैतिकता, विश्लेषणात्मक सोच और सांस्कृतिक समझ विकसित होगी। आज केंद्र सभी बिंदुओं पर खरा उतर रहा है।

एमए हिंदू अध्ययन कोर्स 2025-26 सत्र से शुरू

दून विश्वविद्यालय में एमए हिंदू अध्ययन पाठ्यक्रम 2025-26 सत्र, बीते वर्ष जून से शुरू हो गया है, जिसमें पहले चरण में 20 सीटों पर प्रवेश दिया गया है।

पाठ्यक्रम में छात्र हिंदू दर्शन, समाज, साहित्य, धर्म और नेतृत्व कौशल का गहन अध्ययन कर रहे हैं इसके अलावा तत्व-विमर्श (आध्यात्मिक बहस), धर्म और कर्म संबंधी प्रवचन, वाद-परंपरा (वाद-विवाद की परंपराएं), रामायण, महाभारत और नेतृत्व एवं संगठनात्मक व्यवहार जैसे विषय शामिल किए गए हैं।

बीएचयू के बाद, देश का दूसरा हिंदू अध्ययन केंद्र दून विवि

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के बाद, दून विश्वविद्यालय भारतीय दर्शन और वेदों एवं पुराणों के अध्ययन का देश का दूसरा प्रमुख केंद्र है, जो औपचारिक रूप से वेदों, पुराणों और भारतीय दर्शन के साथ-साथ भारतीय ज्ञान परंपराओं के संबंधित पहलुओं को पढ़ा रहा है।

यह केंद्र आधुनिकता और परंपरा के बीच एक सेतु का काम कर रहा है जो विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण वाले नैतिक रूप से जागरूक और सांस्कृतिक रूप से सचेत नागरिकों और नेताओं का पोषण भी कर रहा है।

यूरोप की कई यूनिवर्सिटीज में हिंदू अध्ययन जारी

यूरोप की कई यूनिवर्सिटीज में हिंदू अध्ययन पढ़ाया जाता है, जो इस विषय की वैश्विक प्रासंगिकता को दर्शाता है। जब भारत में इस्लामिक स्टडीज़ जैसे विभाग मौजूद हैं, तो हिंदू स्टडीज़ विभाग की स्थापना भी एक जरूरी और न्यायसंगत कदम है।

देवभूमि उत्तराखंड में इस कोर्स की शुरुआत से आम लोगों को सनातन परंपरा को जानने और समझने का अवसर मिल रहा है। भारत की सांस्कृतिक धरोहर को शिक्षा में अब तक पर्याप्त स्थान नहीं मिल पाया है।

दून विवि का हिंदू अध्ययन विभाग उन उपेक्षित पक्षों के अध्ययन और शोध का केंद्र बना है। भारत में हिंदू अध्ययन के बहुत सीमित केंद्र हैं। दून यूनिवर्सिटी में इसकी स्थापना शोध को नई दिशा देगा और कल्पना व तथ्य के बीच फर्क को समझने की क्षमता विकसित करेगा।

उत्तराखंड संस्कृत संस्थानम् के नाम से जानी जाएगी उत्तराखंड संस्कृत अकादमी

हरिद्वार स्थित उत्तराखंड संस्कृत अकादमी का नाम उत्तराखंड संस्कृत संस्थानम् कर दिया गया है। गुरुवार को मंत्रिमंडल ने इसकी मंजूरी दी। संस्कृत प्रदेश उत्तराखंड में संस्कृत प्रचार-प्रसार के लिए संस्थापित प्रतिष्ठान का नाम शुद्ध, संस्कारित व संस्कृत निष्ठ किए जाने के लिए यह निर्णय लिया गया।

Ad

सम्बंधित खबरें