
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव की तैयारी में कांग्रेस ने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने का फैसला किया है। नई दिल्ली में प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा की अध्यक्षता में हुई बैठक में राज्य को आठ जोन में बांटकर शीर्ष नेताओं को जिम्मेदारी देने पर सहमति बनी।
देहरादून । अगले वर्ष विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर कांग्रेस संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करेगी। नई दिल्ली में पार्टी की उत्तराखंड प्रभारी एवं सांसद कुमारी सैलजा की अगुवाई में हुई वरिष्ठ नेताओं की बैठक में चुनावी रणनीति, संगठन विस्तार और जन मुद्दों को लेकर मंथन किया गया।
यह तय किया गया कि चुनाव के दृष्टिगत राज्य को आठ जोन में बांटकर शीर्ष नेताओं को एक-एक जोन की जिम्मेदारी दी जाएगी। साथ ही मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर पार्टी नजर रखेगी। बैठक में नई प्रदेश कार्यकारिणी के गठन को लेकर चर्चा तो हुई, लेकिन उसे पर अंतिम सहमति नहीं बन सकी।
SIR की अब तक हुई प्रगति की जानकारी ली
प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा ने प्रदेश में लगभग 12 हजार बीएलए की नियुक्ति के संबंध में अब तक हुई प्रगति की भी जानकारी ली। उन्होंने SIR को लेकर एक्शन प्लान तैयार करने को कहा। इसे पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष रखा जाएगा।
उन्होंने नेताओं और कार्यकर्ताओं को गुटीय मतभेदों से ऊपर उठकर एकजुट होकर काम करने की सलाह दी और कहा कि पार्टी को मजबूत बनाने के लिए सभी को मिलकर जनता के बीच जाना होगा।
प्रदेश व केंद्र की भाजपा सरकारों की नीतियों और विफलताओं को जन-जन तक पहुंचाने एवं जनता से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाने पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक में प्रदेश के ज्वलंत मुद्दों, प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और जनहित से जुड़े विषयों पर गंभीर, सार्थक और सकारात्मक चर्चा हुई। नेताओं ने संगठनात्मक मजबूती के साथ आगामी चुनाव के लिए ठोस रणनीति बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह, चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डा. हरक सिंह रावत,पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी, राष्ट्रीय सचिव विधायक काजी निजाम़द्दीन, विधायक तिलक राज बेहड़, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने अपने सुझाव रखे। इस अवसर पर प्रदेश सहप्रभारी सुरेंद्र शर्मा, सीडब्ल्यूसी सदस्य गुरदीप सिंह सप्पल, ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी भी उपस्थित रहे।
बैठक बीच में छोड़कर निकले हरीश रावत
सूत्रों के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत बैठक के बीच में ही उठकर चले गए। उनके इस प्रकार बैठक से जाने को उनके कुछ मुद्दों पर असहज होने से जोड़कर देखा जा रहा है।









