
उत्तराखंड कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के अर्जित अवकाश और गुटबाजी को लेकर आंतरिक कलह गहरा गई है।
देहरादून। वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के अर्जित अवकाश और इसे लेकर चल रही जुबानी जंग के बीच कांग्रेस में मची रार से पार्टी क्षत्रपों की धड़ेबाजी खुलकर सतह पर आ गई है।
एक तरफ भाजपा मिशन-2027 के लिए बिसात बिछा रही है, वहीं कांग्रेस के दिग्गज आपस में ही उलझे हुए हैं।
अपनों की जंग में उलझी कांग्रेस के लिए अब पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव और उत्तराखंड प्रभारी कुमारी सैलजा के आठ से 12 अप्रैल तक राज्य में प्रस्तावित दौरे पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
उनके इस दौरे में स्वाभाविक रूप से यह विषय आएगा। इस दौरान कांग्रेस के सभी धड़ों में सुलह की उम्मीद जताई जा रही है।
उत्तराखंड कांग्रेस इन दिनों दो फाड़ नजर आ रही है। एक ओर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का खेमा है तो दूसरी तरफ प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह व डा हरक सिंह रावत ‘त्रिमूर्ति’ के रूप में खड़े हैं।
हाल में ही रामनगर के एक नेता को पार्टी में शामिल करने को लेकर विवाद इतना गहराया कि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने 15 दिन का अर्जित अवकाश ले लिया।
इसके बाद शुरू हुआ जुबानी तीर छोड़ने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। हरदा समर्थकों ने यहां तक कह दिया कि यदि वरिष्ठ नेता की अनदेखी हुई तो इसके परिणाम ठीक नहीं होंगे।
इस सबको पार्टी में वर्चस्व की जंग के तौर पर देखा जा रहा है। ऐसे में कांग्रेस की विधानसभा चुनाव की तैयारियों को भी झटका सा लगा है।
इस परिदृश्य के बीच अब विवाद के पटाक्षेप और क्षत्रपों में एका के दृष्टिगत सभी की नजरें कांग्रेस की उत्तराखंड प्रभारी कुमारी सैलजा के उत्तराखंड दौरे पर टिक गई हैं।
यद्यपि, उनका यह दौरा अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों के दृष्टिगत है, लेकिन मौजूदा विवाद और धड़ेबाजी का प्रकरण उनके सामने आएगा।
माना जा रहा है कि इस दौरान प्रदेश प्रभारी पार्टी के सभी दिग्गजों को बैठाकर ताजा प्रकरण का पटाक्षेप कराने का प्रयास करेंगी।
साथ ही पार्टी नेताओं को चुनावी साल में बेवजह बयानबाजी से परहेज करने और चुनाव की तैयारियों में एकजुटता से जुटने की नसीहत भी देंगी। यही नहीं, प्रदेश कार्यकारिणी के गठन के दृष्टिगत भी वह मंथन करेंगी।









