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Big Breaking:-बांग्लादेशी सुबेदा के बनवाए फर्जी दस्तावेज, रडार पर रुड़की और पटेलनगर के सीएससी सेंटर

घुसपैठिये फर्जी दस्तावेज कैसे तैयार करवा रहे हैं, इस सवाल पर दून पुलिस की जांच अब उस सिंडिकेट पर टिक गई है जिसने इससे पहले मामून हसन और बबली बेगम जैसे घुसपैठियों को भी फर्जी पहचान दिलाई थी।

पटेलनगर में बृहस्पतिवार को फर्जी दस्तावेज के साथ गिरफ्तार बांग्लादेशी सुबेदा बेगम उर्फ प्रिया के मामले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि राज्य में विदेशी नागरिकों को भारतीय बनाने का सिंडिकेट चल रहा है।

सुबेदा का जन्म प्रमाणपत्र, फर्जी आधार कार्ड, पैन और वोटर कार्ड बनाने में दून व रुड़की स्थित दो सीएससी सेंटर की भूमिका सामने आई है। पटेलनगर पुलिस ने शुक्रवार को दून स्थित सीएससी सेंटर के संचालक फिरोज से घंटों पूछताछ की।

उसने बताया कि उसने सुबेदा का फॉर्म ऑनलाइन पोर्टल के जरिये भेजा था, जिसके दस्तावेजों का सत्यापन बीएलओ की ओर किया गया। अब पुलिस पता लगा रही है कि उस दौरान किन बीएलओ की ड्यूटी रही थी।

घुसपैठिये फर्जी दस्तावेज कैसे तैयार करवा रहे हैं, इस सवाल पर दून पुलिस की जांच अब उस सिंडिकेट पर टिक गई है जिसने इससे पहले मामून हसन और बबली बेगम जैसे घुसपैठियों को भी फर्जी पहचान दिलाई थी।

सुबेदा ने रुड़की के सीएससी संचालक अजीत कुमार और देहरादून के फिरोज का नाम लिया है। यह पैटर्न ठीक वैसा ही है जैसा पिछले साल नवंबर में पकड़े गए मामून हसन के मामले में दिखा था।

बांग्लादेश का रहने वाला मामून सचिन चौहान बनकर नेहरू कॉलोनी में रह रहा था और एक क्लब में बाउंसर की नौकरी कर रहा था।

उसने अपनी त्यूणी की साथी रीना चौहान की मदद से आधार और पैन कार्ड जैसे तमाम दस्तावेज इसी तरह के केंद्रों से फर्जी तरीके से बनवाए थे।

नवंबर में ही पटेलनगर से पकड़ी गई बबली बेगम भी दून में भूमि शर्मा बनकर रह रही थी। उसके पास से भी आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड और वोटर आईडी बरामद हुए थे।

उसके दस्तावेज बनाने वाले भी जांच के दायरे में हैं। इसके साथ ही सुबेदा के फोन से मिले डेटा और बैंक खातों के विवरण की भी जांच जारी है।

बीएलओ की संस्तुति पर उठे सवाल


सुबेदा के मामले ने जांच को एक कदम और आगे बढ़ा दिया है। सुबेदा ने कबूला है कि उसका वोटर कार्ड स्थानीय बीएलओ की संस्तुति पर बना है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक,

मामून और बबली बेगम के मामलों में भी यह सवाल उठा था कि आखिर बिना किसी पुख्ता दस्तावेज के स्थानीय स्तर पर इन विदेशी नागरिकों का सत्यापन कैसे हो जाता है।

आशंका जताई जा रही है कि संबंधित विभागों के कुछ कर्मचारी इस सिंडिकेट के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, जो बाहरी घुसपैठियों को पते का सत्यापन और नाम बदलने में मदद करते हैं।

तहरीर में नामजद आरोपियों की तलाश तेज


एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि पटेलनगर पुलिस ने सुबेदा के पास से मिले बांग्लादेशी भाषा के पहचानपत्र और अन्य फर्जी दस्तावेजों को कब्जे में लेकर जांच तेज कर दी है। पुलिस की एक टीम रुड़की में अजीत की तलाश में लगाई गई है।

यह पता लगाया जा रहा है दोनों सीएससी सेंटर से अब तक कितने और बांग्लादेशियों को भारतीय नागरिक बनाया है। उनके रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। सुबेदा के पास से प्रिया रॉय व मोनी नाम से वोटर कार्ड, पैन और आधार कार्ड मिले।

बता दें कि दून में अब तक 20 बांग्लादेशी नागरिक रडार पर आ चुके हैं। इनमें से 10 को डिपोर्ट किया जा चुका है, जबकि फर्जी दस्तावेज बनाने वाले 10 आरोपियों को जेल भेजा गया है।

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