उत्तराखण्ड

Big Breaking:-रामनगर में पहली बार दिखा उत्तराखंड का दुर्लभ पक्षी स्पोटेड फ्लाईकैचर, हैदराबाद के पर्यटक के कैमरे में हुआ कैद

रामनगर के हाथी डगर पर्यटन जोन में पहली बार दुर्लभ स्पोटेड फ्लाईकैचर पक्षी देखा गया, जिसे हैदराबाद के एक पर्यटक ने कैमरे में कैद किया।

रामनगर। कार्बेट व बाहरी वन प्रभागों के जंगल बाघों के लिए ही नहीं बल्कि पक्षियों के लिए भी जाने जाते हैं। यहां ऐसे दुर्लभ पक्षी भी दिखाई देते हैं जो देश दुनिया के पक्षी प्रेमियों के लिए खास होते हैं। ऐसा ही एक स्पोटेड फ्लाईकैचर दुर्लभ पक्षी तराई पश्चिमी वन प्रभाग के हाथीडगर पर्यटन जोन में पहली बार नजर आया है।

हाथीडगर पर्यटन जोन में सफारी के दौरान तीन अक्टूबर को हैदराबाद से आए पर्यटक शिवा एन कुमार ने प्रकृतिविद मो. नफीस के साथ इस दुर्लभ स्पोटेड फ्लाईकैचर पक्षी को देखा। पर्यटक शिवा एन कुमार ने इस खास पल को अपने कैमरे में कैद किया।

नफीस ने बताया कि रामनगर में कार्बेट, रामनगर वन प्रभाग व तराई पश्चिम वन प्रभाग के जंगल में पहले कभी नहीं दिखा है। इसका मिलना निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण रिकार्ड है। प्रकृति संरक्षण, जैव विविधता की रक्षा और संकटग्रस्त प्रजातियों की रेड लिस्ट जारी करने वाला आईयूसीएन ने अपनी रेड लिस्ट में इसे अभी कम चिंताजनक की श्रेणी में रखा है।

भारत में मार्ग प्रवासी के रूप में ठहरता है स्पोटेड फ्लाईकैचर

रामनगर: यूरोपीय देशों ठंड शुरू होती है और कीड़े मकोड़े कम होने लगते हैं, यह सैकड़ों किलोमीटर की लंबी और कठिन यात्रा तय करके अफ्रीका के महाद्वीप के गर्म देशों की ओर चला जाता है। यात्रा के दौरान आते जाते यह भारत के पश्चिमी व उत्तर पश्चिमी क्षेत्र में मार्ग प्रवासी के रूप में कुछ समय ठहरता है।

सर्दियों के लिए अफ्रीका जाते समय सितंबर व अक्टूबर और गर्मियों में वापस यूरोप व साइबेरिया लौटते समय मार्च व अप्रैल में यह भारतीय उपमहाद्वीप से होकर गुजरता है।

दो सौ से ढाई सौ पक्षी प्रजातियां मौजूद

रामनगर: कार्बेट लैंडस्केप में लगभग 600 पक्षी प्रजातियां है। हालांकि तराई पश्चिमी वन प्रभाग ने अपने वन क्षेत्र में मिलने वाली पक्षी प्रजातियों की चेक लिस्ट तैयार नहीं की है। विभाग का कहना है कि लगभग फाटो व हाथीडगर वन क्षेत्र में दो सौ से ढाई सौ स्थानीय पक्षी प्रजातियां हैं।

शिकार को हवा में ही लपकने की है खासियत

रामनगर: यह एक छोटा और फुर्तीला कीटभक्षी पक्षी है। इसका ऊपरी हिस्सा मटमैला स्लेटी व भूरा और निचला हिस्सा सफेद होता है। इसके सिर व छाती पर हल्के स्पोट होते हैं। जिससे इसका नाम स्पोटेड पड़ा। यह अक्सर किसी ऊंचे स्थान पर बैठकर उड़ते हुए कीड़े मकोड़ों को हवा में ही लपकने के लिए जाना जाता है।

फाटो व हाथीडगर बाघों के लिए ही नहीं बर्ड वाचिंग के लिए भी अच्छे जोन है। यहां पक्षियों की अच्छी प्रजाति मौजूद हे। शीघ्र ही तराई पश्चिमी वन प्रभाग का सर्वे कराकर पक्षियों की विभागीय चेक लिस्ट भी तैयार की जाएगी। जिससे पता लग सके कि यहां कौन-कौन प्रजाति के पक्षी मौजूद है।पक्षी स्थल दिखाने के लिए एक नक्शा भी बनाया जाएगा। – पुनीत तोमर, प्रभागीय वनाधिकारी, तराई पश्चिमी वन प्रभाग रामनगर

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