
जापान की जायका एजेंसी उत्तराखंड में वन संसाधन प्रबंधन परियोजना के दूसरे चरण को वित्त पोषित करेगी। 10 साल की इस परियोजना की लागत लगभग 1500 करोड़ रुपये होगी, जिसमें जायका 85% अंशदान करेगी।
देहरादून। जापान की एजेंसी जायका (जापान इंटरनेशनल कोआपरेशन एजेंसी) के वित्त पोषण से राज्य में उत्तराखंड वन संसाधन प्रबंधन परियोजना के द्वितीय चरण के लिए कवायद प्रारंभ कर दी गई है। 10 साल की इस परियोजना की लागत लगभग 1500 करोड़ रुपये होगी।
इस बीच शुक्रवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उनके आवास पर जायका के भारत में मुख्य प्रतिनिधि टेकुची टकुरो ने मुलाकात की। उन्होंने राज्य में वन संसाधन प्रबंधन परियोजना के द्वितीय चरण के लिए जायका की ओर से हरसंभव सहयोग प्रदान करने की बात कही। बाद में उन्होंने वन मंत्री सुबोध उनियाल से भी मुलाकात की।
जायका वित्त पोषित 10 वर्षीय वन संसाधन प्रबंधन परियोजना वर्ष 2014 में शुरू हुई थी। 807 करोड़ की इस परियोजना की अवधि कोरोना काल के चलते बाद में बढ़ाकर 31 अगस्त, 2026 कर दी गई थी।
13 वन प्रभागों की 37 रेंजों के 839 वन पंचायतों में यह परियोजना संचालित की गई। इसके साथ ही ईको रेस्टोरेशन, आजीविका गतिविधियां और भूकटाव की रोकथाम को जापानी तकनीक से कार्य कराए गए। ये कार्य पूर्ण होने की ओर अग्रसर हैं।
इसके साथ ही अब परियोजना के द्वितीय चरण के लिए प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार हो चुकी है। वर्ष 2026 से 2035 की इस परियोजना की लागत 1500 करोड़ आंकी गई है। इसमें 85 प्रतिशत अंश जायका और 15 प्रतिशत राज्य सरकार का है। परियोजना 47 रेंज में प्रस्तावित है। वन विभाग ने इस संबंध में रिपोर्ट शासन को भेजी है, जिस पर वित्त विभाग में मंथन चल रहा है। फिर इसे केंद्र को भेजा जाएगा।
मुख्यमंत्री और वन मंत्री से मुलाकात के दौरान जायका के भारत में मुख्य प्रतिनिधि टेकुची टकुरो ने उत्तराखंड में परियोजना की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। साथ ही आगे के लिए भी सहयोग देने की बात कही। इस अवसर पर जायका के मुख्य विकास संचालक विनीत सरीन, वन संसाधन प्रबंधन परियोजना के मुख्य परियोजना निदेशक नरेश कुमार उपस्थित रहे।









