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Big Breaking:-उत्तराखंड में उल्लू के शिकार की आशंका को लेकर टेंशन; वनकर्मियों को किया गया सतर्क

दिवाली के समय कुछ लोगों एक अंधविश्वास में उल्लू का इस्तेमाल करते हैं। इसके लिए उल्लू की मनमानी की कीमत देने को भी तैयार रहते हैं।

वन महकमे की दिवाली के करीब के आने के साथ ही उल्लू के शिकार की आशंका को लेकर टेंशन बढ़ गई है। उल्लू के शिकार की आशंका के मद्देनजर अधिकारियों ने फील्ड कर्मियों को सतर्क किया है।

दिवाली के समय कुछ लोगों एक अंधविश्वास में उल्लू का इस्तेमाल करते हैं। इसके लिए उल्लू की मनमानी की कीमत देने को भी तैयार रहते हैं। इसके अलावा सर्दियों के समय उच्च हिमालीय क्षेत्र में हिमपात के कारण निचली ऊंचाई वाले क्षेत्रों और घाटियों में आ जाते हैं, इन कारणों से वन्यजीवों के शिकार की आशंका रहती है।

इसके दृष्टिगत अधिकारियों ने फील्ड कर्मियों को सतर्क किया है। राजाजी टाइगर रिजर्व निदेशक कोको रोसे ने सभी रेंजरों को पत्र भेजा है, इसमें कहा गया है कि अंधविश्वास के चलते उल्लुओं के शिकार की आशंका रहती है, जबकि उल्लू वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 यथा संशोधित 2022 के तहत पूरी तरह संरक्षित श्रेणी में आता है।

ऐसे में प्रत्येक बैरियर पर वाहनों की जांच की जाए। अपर प्रमुख वन संरक्षक प्रशासन विवेक पांडे कहते हैं कि वन कर्मियों का सतर्क किया गया है। चौकसी बरती जा रही है। वन कर्मियों को निगरानी के लिए कैमरा ट्रैप, ड्रोन जैसे आधुनिक माध्यमों का इस्तेमाल करने को कहा गया है।

अपरिहार्य स्थिति में मिलेगा अवकाश


देहरादून। राजाजी टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की सुरक्षा की दृष्टि चौकसी बढ़ाने के साथ अन्य कदम भी उठाए हैं। आरटीआर निदेशक के जारी पत्र के अनुसार वन कर्मियों का केवल अपरिहार्य स्थिति में अवकाश स्वीकृत होगा।

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