गंगा एक्सप्रेसवे के हरिद्वार विस्तार को लेकर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच जल्द ही समझौता ज्ञापन (एमओयू) होगा।
देहरादून। देश की सबसे महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में शामिल गंगा एक्सप्रेसवे का हरिद्वार तक विस्तार करने से पूर्व उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकारों के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) जल्द होना है।
लेकिन उससे पहले दोनों राज्य यह तय करने में लगे हैं कि उत्तराखंड में आने वाले हिस्से का निर्माण कौन करेगा और उस पर टोल वसूली का अधिकार किसके पास होगा।
इसी मुद्दे पर अंतिम सहमति बनाई जा रही है। दोनों राज्यों के अनुसार बातचीत सकारात्मक है। किसी प्रकार का कोई गतिरोध नहीं है।
पीएम नरेन्द्र मोदी ने अप्रैल में गंगा एक्सप्रेसवे के हरिद्वार तक विस्तार की घोषणा की थी। इसके बाद से उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) और उत्तराखंड लोक निर्माण विभाग परियोजना की रूपरेखा को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ से प्रयागराज तक लगभग 594 किलोमीटर लंबा है। यह मेरठ से प्रयागराज तक 12 जिलों को जोड़ रहा है। हरिद्वार विस्तार के तहत अमरोहा से एक नया कारिडोर निकलेगा, जो बिजनौर होते हुए हरिद्वार पहुंचेगा। प्रस्तावित विस्तार की लंबाई लगभग 146 किलोमीटर होगी।
इसमें अधिकांश हिस्सा उत्तर प्रदेश में आएगा, जबकि लगभग 25 से 30 किलोमीटर भाग उत्तराखंड में होगा। परियोजना पूरी होने पर प्रयागराज से हरिद्वार तक तेज सड़क कनेक्टिविटी स्थापित हो जाएगी।
अमरोहा और बिजनौर में तेज हुई गतिविधियां
परियोजना को लेकर सबसे अधिक प्रगति फिलहाल अमरोहा और बिजनौर में दिखाई दे रही हैं। अमरोहा में यूपीडा ने 62 गांवों के बंदोबस्ती नक्शे तलब किए हैं। भूमि चिह्नीकरण और रूट निर्धारण का काम चल रहा है।
वहीं बिजनौर में 117 गांवों को प्रस्तावित अलाइनमेंट में शामिल किया गया है। हरिद्वार में लगभग 25 गांव इस परियोजना के प्रभाव क्षेत्र में आएंगे। उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के बीच अलाइनमेंट को लेकर प्रारंभिक सहमति बन चुकी है।
30 किलोमीटर हिस्से पर असली पेच
दोनों राज्यों के बीच असली पेच उत्तराखंड में आने वाले करीब 30 किलोमीटर हिस्से को लेकर है। दोनों राज्य दो विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। पहला, अमरोहा से हरिद्वार तक का निर्माण यूपीडा कराए। दूसरा, उत्तराखंड की सीमा में आने वाले हिस्से का निर्माण उत्तराखंड सरकार कराए।
टोल का गणित तय करेगा माडल
निर्माण एजेंसी का फैसला सीधे टोल व्यवस्था से जुड़ा हुआ है। यदि उत्तराखंड का हिस्सा भी यूपीडा बनाती है तो हरिद्वार तक पूरे कारिडोर पर टोल संचालन और राजस्व संग्रहण का अधिकार उत्तर प्रदेश की एजेंसी के पास रहेगा।
वहीं यदि उत्तराखंड अपने हिस्से का निर्माण स्वयं कराता है तो राज्य अपने क्षेत्र में टोल वसूली का काम संभालेगा। एमओयू में इस पर स्पष्ट प्रविधान किया जाएगा।
गंगा एक्सप्रेस-वे के विस्तार को लेकर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच जल्द एमओयू हो जाएगा। दोनों राज्यों में लगातार संवाद चल रहा है, किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं है।
-जसवंत सिंह सैनी, औद्योगिक विकास राज्यमंत्री, उत्तर प्रदेश