उत्तराखण्ड

Big Breaking:-हरिद्वार अर्धकुंभ: अस्थायी पुलों पर 9 करोड़ के खर्च पर उठे सवाल, पुराने पिलर मौजूद होने के बाद कैसे हुआ इतना खर्च

हरिद्वार के हरकी पैड़ी पर अर्धकुंभ के लिए तीन अस्थायी पुलों के निर्माण पर 9.03 करोड़ रुपये के बजट पर सवाल उठ रहे हैं, जबकि पुराने पिलर और सामग्री पहले से मौजूद है।

हरिद्वार। अर्धकुंभ की तैयारियों में हरकी पैड़ी पर बने तीन अस्थायी पुलों के नाम पर बजट का अजब गणित सामने आया है। तीनों पुलों की स्थापना, मरम्मत, रखरखाव और मेला समाप्त होने के बाद हटाने के लिए 7.31 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

इसके बाद इन्हीं तीन पुलों के पिलर की मरम्मत के लिए 33 लाख और अस्थायी रैम्प निर्माण के लिए 1.39 करोड़ रुपये की अलग-अलग स्वीकृति दी गई है।

इस तरह तीन अस्थायी पुलों पर कुल 9.03 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है। इस पूरी योजना पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि तीनों अस्थायी पुलों के पिलर का निर्माण वर्ष 2004 में किया गया था। वहीं, पुल निर्माण में इस्तेमाल होने वाले गार्डर और अन्य जरूरी सामग्री की खरीद भी पहले ही की जा चुकी है।

इनका इस्तेमाल कुंभ और अर्धकुंभ के दौरान अस्थायी पुल तैयार करने में किया जाता रहा है। मेला समाप्त होने के बाद गार्डर और अन्य निर्माण सामग्री को लालजीवाला में सुरक्षित रख दिया जाता है, ताकि अगले आयोजन में इनका दोबारा इस्तेमाल किया जा सके।

ऐसे में जब पुलों के पिलर पहले से मौजूद हैं और निर्माण में इस्तेमाल होने वाली प्रमुख सामग्री भी उपलब्ध है तो फिर 7.31 करोड़ रुपये का बजट आखिर किन कार्यों पर खर्च किया जाएगा?

हैरानी की बात यह है कि तीनों अस्थायी पुलों की स्थापना, मरम्मत और रखरखाव के लिए 14 अक्टूबर 2025 को जारी शासनादेश में 7.31 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

इसके बावजूद इन्हीं पुलों के पिलरों की मरम्मत के लिए 27 मार्च 2026 को जारी शासनादेश में 33 लाख रुपये स्वीकृत किए गए। इसी तरह पुलों तक श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिए अस्थायी रैम्प निर्माण के नाम पर 27 मार्च 2026 को 1.39 करोड़ रुपये का बजट भी अलग से मंजूर किया गया है।

दरअसल, अस्थायी पुलों की व्यवस्था प्रत्येक कुंभ और अर्धकुंभ में की जाती है। इसके लिए पहले से उपलब्ध सामग्री का इस्तेमाल होता है और आयोजन के बाद उसे सुरक्षित रख लिया जाता है।

भले ही अर्धकुंभ जैसे बड़े आयोजन में श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए अस्थायी पुलों के साथ स्थाई पुल अधिक जरूरी हैं, लेकिन, सुविधा के नाम पर सरकारी खजाने से खर्च होने वाली रकम का हिसाब भी उतना ही जरूरी है।

एक साथ कार्य स्वीकृत और बजट जारी इसलिए नहीं हुआ है कि, जब नहर बंदी हुई तब हमें पता लगा कि नहर के नीचे क्या स्थिति है। अभी रैम्प नहीं बने हैं, कुछ समय बाद बनेंगे। 12 साल में एक बार अस्थाई पुल लगाए जाते हैं।

इस बार जो अस्थाई पुल लगाए जा रहे हैं, उनको अब 2033 के कुंभ के बाद हटाया जाएगा। अर्धकुंभ 2016 में जो अस्थाई पुल लगाए गए थे, उन्हें 2021 के कुंभ के बाद हटाया गया था।

मनोज कुमार, अधिशासी अभियंता

राजकीय सिंचाई उद्योगशाला स्थापना खंड रुड़की

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