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Big Breaking:-उत्तराखंड में आज से सैकड़ों शिक्षक करेंगे भवन गणना, विद्यालयों में पढ़ाई ठप

उत्तराखंड में शिक्षकों की भवन गणना ड्यूटी से सैकड़ों विद्यालयों में पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी के कारण पठन-पाठन पर संकट आ गया है।

देहरादून। प्रदेश में चल रही भवन गणना ड्यूटी के चलते सैकड़ों विद्यालयों में पठन-पाठन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। बड़ी संख्या में शिक्षकों की इस कार्य में तैनाती से कई विद्यालयों में पढ़ाने के लिए एक भी शिक्षक उपलब्ध नहीं है।

खासकर दो शिक्षक वाले प्राथमिक विद्यालयों में दोनों शिक्षकों को एक साथ ड्यूटी पर भेजे जाने से विद्यालयों के संचालन पर संकट खड़ा हो गया है।

हालांकि प्रारंभिक शिक्षा निदेशक कंचन देवराड़ी का कहना है कि पढ़ाई के बाद शिक्षक भवन गणना करें।

जानकारी के अनुसार, प्रदेश में भवन गणना में लगाए गए कुल कार्मिकों में 80 प्रतिशत से अधिक शिक्षक हैं। यह ड्यूटी 25 अप्रैल से 24 मई तक चलेगी।

ऐसे में एक माह तक शिक्षा व्यवस्था प्रभावित रहने की आशंका जताई जा रही है। कुछ खंड शिक्षा अधिकारियों की ओर से जारी आदेशों में शिक्षकों को पहले विद्यालय में पढ़ाने और उसके बाद भवन गणना का कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।

इस दोहरे दायित्व को लेकर शिक्षकों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि दोनों कार्य एक साथ करना व्यावहारिक नहीं है और इससे न तो पढ़ाई सही ढंग से हो पा रही है और न ही सर्वे कार्य।

इन विद्यालयों में यह भी शिक्षक नहीं

ऋषिकेश के राजकीय प्राथमिक विद्यालय नंबर 10, डोईवाला के बाजावाला और नग्घेर स्थित विद्यालयों में दोनों शिक्षकों की ड्यूटी भवन गणना में लगाए जाने से स्कूल बंद होने की नौबत हैं।

तीनों विद्यालयों में छात्र संख्या भी अधिक है। ऐसे में छात्रों को पढ़ाई के अलावा कौन संभालेगा, यह भी चिंता का सबब बना हुआ है। दून के आसपास ऐसे विद्यालयों की संख्या 29 है।

बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो : धर्मेंद्र रावत

प्राथमिक शिक्षक संघ के देहरादून जनपद के अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह रावत ने कहा कि ड्यूटी लगाते समय यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए था कि बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो।

भवन गणना के साथ पढ़ाई भी अनिवार्य : निदेशक

प्रारंभिक शिक्षा निदेशक कंचन देवराड़ी ने मामले पर संतुलन बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक को महीनेभर में डेढ़ से दो सौ घरों की ही गणना करनी है। यानी एक दिन में पांच से सात घर।

ऐसे में पहले स्कूल जाकर शिक्षक पठन-पाठन पूरा करें और उसके बाद भवन गणना कर सकता है। दोनों कार्य राष्ट्रहित में हैं। इनसे कोई समझौता नहीं हो सकता है।

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