उत्तराखण्ड

Big Breaking:-IMA पासिंग आउट परेड: पिता नौसेना में थे कमांडर, अब बेटी बनेगी आर्मी अफसर

भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) देहरादून की पासिंग आउट परेड में ऐन रोज मैथ्यू पहली महिला अधिकारी बनकर इतिहास रचेंगी।

देहरादून। भारतीय सैन्य अकादमी (Indian Military Academy), देहरादून की शनिवार होने वाली पासिंग आउट परेड कई मायनों में ऐतिहासिक होने जा रही है।

इस बार देश को सेना के नए अफसर तो मिलेंगे ही, साथ ही आइएमए के पहले महिला बैच के पास आउट होने का गौरवशाली इतिहास भी लिखा जाएगा।

इस ऐतिहासिक बैच का एक चमकता हुआ चेहरा हैं केरलम की ऑफिसर कैडेट ऐन रोज मैथ्यू, जिन्होंने अपने हौसले से इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया है।

ऐन रोज की यह सफलता न सिर्फ उनके परिवार के लिए गर्व की बात है, बल्कि देश की उन हजारों बेटियों के लिए भी एक बड़ी प्रेरणा है जो सशस्त्र बलों (Armed Forces) में करियर बनाने का सपना देखती हैं।

पिता से मिली प्रेरणा

मूल रूप से मनंथावडी (केरलम) की रहने वाली ऐन रोज के घर में बचपन से ही देशसेवा और कड़े अनुशासन का माहौल था। उनके पिता कमांडर एम.पी. मैथ्यू (सेवानिवृत्त) भारतीय नौसेना में अधिकारी रहे हैं।

बचपन में जब भी ऐन रोज अपने पिता को नौसेना की सफेद कड़क वर्दी में देश की सेवा करते देखती थीं, तो उनके मन में भी देश के लिए कुछ कर गुजरने और वर्दी पहनने का सपना था। समय के साथ यह सपना उनके जीवन का एकमात्र लक्ष्य बन गया।

जब NDA के खुले द्वार

साल 2021 भारतीय सैन्य इतिहास का एक बड़ा टर्निंग पॉइंट था, जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पहली बार महिलाओं के लिए राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के दरवाजे खोले गए।

ऐन रोज ने इस सुनहरे अवसर को हाथ से जाने नहीं दिया और कड़ी परीक्षा पास कर एनडीए में प्रवेश पाने वाली देश की उन चुनिंदा शुरुआती युवतियों में शामिल हुईं।

एनडीए का प्रशिक्षण अपनी कठोर शारीरिक क्षमताओं, मानसिक दृढ़ता और कठिन परीक्षाओं के लिए जाना जाता है। इन सभी चुनौतियों को पार करते हुए ऐन रोज ने खुद को एक बेहतरीन और सक्षम सैन्य अधिकारी के रूप में ढाला।

बेटी संभालेगी सरहद

ऐन रोज का कहना है कि ट्रेनिंग के दौरान आई हर चुनौती ने उन्हें और अधिक मजबूत बनाया। उनकी यह उपलब्धि बदलते भारत की उस खूबसूरत तस्वीर को बयां करती है, जहां अब बेटियां किसी भी मोर्चे पर पीछे नहीं हैं।

घर की जिस विरासत को पिता ने नौसेना (Navy) में रहकर सींचा था, अब बेटी भारतीय सेना (Army) की वर्दी पहनकर उसी सैन्य विरासत को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार है।

कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं

ऐन रोज मैथ्यू का मानना है कि यदि आपका संकल्प मजबूत हो और आप पूरी निष्ठा के साथ मेहनत करते हैं, तो दुनिया का कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। बेटियां न केवल अपने परिवार की विरासत को आगे बढ़ा सकती हैं, बल्कि अपने दम पर नया इतिहास भी रच सकती हैं।

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