धामी सरकार ने उत्तराखंड के मदरसों में धार्मिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव किया है। अब नफरत, हिंसा और कट्टरता को बढ़ावा देने वाला पाठ्यक्रम प्रतिबंधित कर प्रेम, सद्भाव व भाईचारे पर जोर दिया जाएगा।
देहरादून । उत्तराखंड में मदरसों में शुक्रवार (जुम्मे) के स्थान पर रविवार को साप्ताहिक अवकाश लागू करने के बाद धामी सरकार ने धार्मिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में बदलाव की दिशा में भी बड़ा कदम बढ़ाया है।
सरकार ने पंजीकृत मदरसों में राष्ट्रीय पाठ्यक्रम के साथ दीनी तालीम के लिए भी पाठ्यक्रम निर्धारित किया है। नफरत, हिंसा और कट्टरता को बढ़ावा देने वाला पाठ्यक्रम प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसके बजाय नए पाठ्यक्रम में प्रेम, सद्भाव और भाईचारे पर जोर दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश में 20 जून, 2026 को मदरसा बोर्ड समाप्त करने के बाद सरकार ने उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया। इसके माध्यम से मदरसों की शिक्षा व्यवस्था के मानक नए सिरे से निर्धारित किए गए हैं। अब मदरसों में आधुनिक शिक्षा के साथ धार्मिक शिक्षा देने के लिए भी निर्धारित पाठ्यक्रम का पालन करना होगा।
अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने तय किया पाठ्यक्रम
नवगठित उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने पंजीकृत मदरसों में दोपहर बाद इस्लामिक धार्मिक शिक्षा देने का ऐच्छिक प्रविधान किया है। इसके लिए पाठ्यक्रम भी निर्धारित किया गया है।
प्राधिकरण के अध्यक्ष प्रो. सुरजीत सिंह गांधी के अनुसार, इस्लामिक शिक्षा का पाठ्यक्रम विद्वान इस्लामिक स्कालर्स की मदद से तैयार कराया गया है। इसमें नफरत, हिंसा, कट्टरता और कटुता को बढ़ावा देने वाली शिक्षा का कोई स्थान नहीं रखा गया है।
आधुनिक शिक्षा के विषय पढ़ाना अनिवार्य
उत्तराखंड में सरकार से पंजीकृत मदरसों को सुबह के समय राज्य सरकार द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार हिंदी, गणित, विज्ञान और अंग्रेजी सहित अन्य विषय पढ़ाने अनिवार्य हैं। मान्यता के लिए शिक्षा विभाग और अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के नियमों व शर्तों का पालन करना होगा। अल्पसंख्यक विभाग के सचिव डा. पराग मधुकर धकाते के अनुसार, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दृष्टिकोण के अनुरूप धार्मिक शिक्षा का नया पाठ्यक्रम तैयार कराया गया है।
उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड समाप्त करने के बाद अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण बनाया गया है। सभी मदरसों को प्राधिकरण और उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से मान्यता लेना अनिवार्य है। मदरसों में क्या पढ़ाया जाएगा, इसके लिए पाठ्यक्रम भी निर्धारित किया गया है। विद्वान इस्लामिक स्कालर्स द्वारा तैयार इस पाठ्यक्रम में हिंसा, नफरत और कट्टरवाद का कोई स्थान नहीं है। हमारी सरकार चाहती है कि देवभूमि में नई पीढ़ी प्रेम और सद्भाव की बात करे तथा राष्ट्रसेवा में योगदान दे।’ – पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री



