Big Breaking:-अब उत्तराखंड से कांपती धरती पर पैनी नजर, आठ शहरों में बनेंगी Earthquake Observatory

उत्तराखंड सरकार भूकंपीय निगरानी तंत्र को मजबूत कर रही है। हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए आठ शहरों में नई भूकंप वेधशालाएं स्थापित की जाएंगी।

देहरादून । हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता और भविष्य की चुनौतियों के दृष्टिगत सरकार ने उत्तराखंड में भूकंपीय निगरानी तंत्र को मजबूत बनाने का निश्चय किया है। इसी कड़ी में आठ शहरों में भूकंप वेधशालाएं स्थापित की जाएंगी।

इस सिलसिले में भूमि चयन कर विस्तृत रिपोर्ट राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र को भेजी गई है। यही नहीं, भूकंप चेतावनी प्रणाली को सशक्त बनाने के लिए सेंसर की संख्या को 500 तक विस्तारित करने का लक्ष्य है। वर्तमान में 169 सेंसर संचालित हैं।

भूकंपीय दृष्टि से उत्तराखंड बेहद संवेदनशील है। भूकंपीय जोन चार व पांच के अंतर्गत होने के कारण यहां बड़े भूकंप की आशंका बनी रहती है। यही नहीं, रिक्टर पैमाने पर दो से चार परिमाण वाले भूकंप से विभिन्न इलाकों में धरती अक्सर कांपती रहती है।

इसे देखते हुए अब राज्य में भूकंपीय गतिविधियों के सटीक आकलन को सूक्ष्म स्तरीय मानीटरिंग की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इसके साथ ही कम तीव्रता वाले भूकंपों की पहचान करने और भूकंप चेतावनी प्रणाली को मजबूत बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।

इन शहरों में बनेंगी वेधशालाएं

रुड़की, देवप्रयाग, कर्णप्रयाग, रामनगर, बागेश्वर, अल्मोड़ा, केदारनाथ व चकराता में भूकंपीय वेधशालाओं के लिए संबंधित जिला प्रशासन के सहयोग से भूमि चयनित की गई है। अब राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र से हरी झंडी मिलने के बाद इन वेधशालाओं की स्थापना की जाएगी।

इससे जमीन के भीतर होने वाली सूक्ष्म हलचल को रिकार्ड करने में मदद मिलेगी। साथ ही कम तीव्रता वाले भूकंप की पहचान कर आपदा से संबंधित सभी विभागों को तत्काल सूचना उपलब्ध कराने में यह लाभदायक होगा।

सेंसर लगाने को हो चुका भौगोलिक सर्वेक्षण

भूकंप चेतावनी प्रणाली की मजबूती पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है। इस क्रम में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में अभी तक 169 सेंसर लगाए गए हैं। अब केंद्र के राष्ट्रीय भूकंप जोखिम न्यूनीकरण कार्यक्रम के तहत इनकी संख्या 500 तक ले जाने का लक्ष्य है।

इन सेंसर के लिए भौगोलिक सर्वेक्षण हो चुका है। साथ ही सेंसर के विस्तार के दृष्टिगत केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। यही नहीं, सेंसर के लगाने के साथ ही 500 भवनों पर सायरन भी स्थापित किए जाएंगे।

10 शहरों का भूकंपीय जोखिम मूल्यांकन

सरकार ने यह भी तय किया है कि 10 शहरों का भूकंपीय सूक्ष्म क्षेत्रीयकरण और जोखिम मूल्यांकन कराया जाएगा। इन शहरों में देहरादून, मसूरी, हरिद्वार, ऋषिकेश, उत्तरकाशी, गोपेश्वर, चमोली, जोशीमठ, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग व नैनीताल शामिल हैं।

‘भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील उत्तराखंड में भूकंप चेतावनी प्रणाली को सशक्त बनाने पर विशेष जोर है। इसी कड़ी में वेधशालाओं की स्थापना व सेंसर के विस्तार की दिशा में आगे बढ़ा जा रहा है।’ -विनोद कुमार सुमन, सचिव आपदा प्रंबधन

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