Big Breaking:-उत्तराखंड में पीएमजीएसवाई की टाइम लाइन बढ़ी, अब रफ्तार पकड़ेंगी गांव की सड़कें

केंद्र सरकार ने उत्तराखंड में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के पहले, दूसरे और तीसरे चरण के कार्यों को पूरा करने की समय सीमा मार्च 2027 तक

देहरादून। विषम भूगोल वाले उत्तराखंड में सड़कें केवल आवागमन का साधन ही नहीं, बल्कि जीवनरेखा हैं। इसी कड़ी में ग्रामीण क्षेत्रों को सड़क सुविधा से जोड़ने में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) अहम भूमिका निभा रही है, लेकिन समय सीमा को लेकर संशय के बादल भी थे। अब इस मामले में डबल इंजन का दम दिखा है।

केंद्र सरकार ने राज्य में पीएमजीएसवाई के प्रथम चरण के अवशेष भुगतान के साथ ही द्वितीय व तृतीय चरण के कार्यों को पूरा करने की अवधि अगले वर्ष मार्च तक विस्तारित कर दी है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र भेजकर यह जानकारी दी है।

अब पीएमजीएसवाई के तीनों चरणों की 214 सड़कों व 40 पुलों का निर्माण कार्य रफ्तार पकड़ेगा। मुख्यमंत्री धामी ने इसके लिए केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया है।

अभी तक सड़क से जुड़ चुके 1863 गांव

उत्तराखंड में राज्य गठन से लेकर अब तक पीएमजीएवाई के अंतर्गत 250 से अधिक आबादी वाली 1863 बसावटों (गांवों) को सड़क सुविधा से जोड़ा जा चुका है। इनके निर्माण में 11 हजार करोड़ से अधिक की धनराशि खर्च हुई है।

लटके हुए थे ये काम

पीएमजीएसवाई के प्रथम चरण में स्वीकृत 63 सड़कें तो बनीं, लेकिन इनमें से 30 में पुल नहीं बन पाए थे। साथ ही 33 सड़कें कुछ स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई थीं। इनके लिए 64 करोड़ रुपये की दरकार थी, जो अवमुक्त नहीं हो पाए थे। इसके अलावा द्वितीय चरण में सात करोड़ रुपये की लागत की एक सड़क व एक पुल का निर्माण लंबित था।

साल रही थी समयावधि की चिंता

केंद्र ने पीएमजीएसवाई के तृतीय चरण में 180 सड़कों व नौ पुलों के निर्माण को 986 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी थी। इन कार्यों को पूरा करने की अवधि मार्च 2026 तक निर्धारित की गई थी। विषम भूगोल समेत अन्य कारणों के इनमें कई सड़कों के काम अभी पूरे नहीं हो पाए हैं। ऐसे में समयावधि बढ़ाने के लिए राज्य ने केंद्र में दस्तक दी थी।

सड़क से जुड़ेंगे 1510 गांव

पीएमजीएसवाई के चतुर्थ चरण में 1510 गांवों को सड़क से जोड़ने का लक्ष्य है। अभी तक केंद्र ने 184 सड़कों के निर्माण के लिए 1700 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। इन सड़कों से 309 गांव जुड़ेंगे। उत्तराखंड ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण से मिली जानकारी के अनुसार अन्य गांवों के लिए डीपीआर तैयार की जा रही हैं, जिन्हें केंद्र को भेजा जाएगा।

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