
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस काम में जनसहभागिता को बढ़ाने का प्रयास संस्थान करे। लोगों की सहभागिता से इस कार्य को व्यापक रूप दें।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मृदा स्वास्थ्य संरक्षण एवं जल संसाधनों का सतत प्रबंधन देश के कृषि विकास की आधारशिला है। इसके अलावा यह विकसित भारत-2047 के लक्ष्य से सीधे जुड़ा है।
यह बात केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री चौहान ने भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान के दौरे के दौरान कही। उन्होंने कहा कि इस काम में जनसहभागिता को बढ़ाने का प्रयास संस्थान करे। लोगों की सहभागिता से इस कार्य को व्यापक रूप दें।
संस्थानों के किए गए कार्यों के प्रभाव की रिपोर्ट दें
चौहान ने संस्थान के अधिकारियों से कहा कि संस्थान के माध्यम से जो इस वर्ष कार्य किया जाएगा। उसका धरातल पर क्या बदलाव हुआ है उसकी रिपोर्ट उपलब्ध कराएं। इसके साथ ही आगामी पांच वर्षों में संस्थान के माध्यम से होने वाले कार्याें का भी रोडमैप प्रस्तुत करें।
किसानों ने अनुभव साझा किए
संस्थान में मंत्री चौहान ने किसानों से बात कर उनके अनुभवों को जाना। सहरानपुर जिले मांडुवाला से आए किसान टी राम ने बताया कि उनका पहले क्षेत्र असिंचित था, संस्थान के माध्यम से करीब साढ़े तीन किमी पाइप लाइन के माध्यम से सिंचाई की व्यवस्था की गई, जिससे खेती बेहतर हुई और आय भी बढ़ी। अजीत कौर बांस की खेती के बाद हुए लाभ के बारे बताया।
किसान अंकित शाह ने भी पौधरोपण के लाभ के बारे में बताया। अन्य किसानों ने बताया कि वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से मृदा अपरदन में कमी आई है। जल संचयन संरचनाओं से जल उपलब्धता में सुधार हुआ है। संस्थान के माध्यम से स्वयं सहायता समूह के सदस्यों को आचार तैयार करने का प्रशिक्षण दिया गया था।
इन स्वयं सहायता समूह के सदस्यों ने इसके बाद आजीविका सुधार के बारे में बताया।बांस से जुड़ी योजनाओं के बारे में भी कृषि मंत्री को बताया गया। इस दौरान राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति उपाध्यक्ष विनय कुमार रुहेला, डॉ. चरण सिंह, डॉ. जेएमएस. तोमर, डॉ. डीवी. सिंह, गिरीश भट्ट, डॉ बांके बिहारी, वैज्ञानिक अमित चौहान, डॉ. सदिकुल इस्लाम आदि मौजूद थे।









