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Big Breaking:-जिस मार्ग पर पालकी में जाते थे राजा-रानी, अब पर्यटक भी करेंगे चहलकदमी

ऐतिहासिक प्रतापनगर-धारकोट मार्ग को अब एडीबी योजना के तहत पर्यटन ट्रैक के रूप में विकसित किया जाएगा। यह 6 किमी लंबा कच्चा मार्ग राजशाही काल में महाराजा प्रताप शाह और महारानी की सवारी का रास्ता था।

इस मार्ग से टिहरी झील, चंद्रबदनी और सुरकंडा मंदिर के विहंगम दृश्य दिखते हैं। पर्यटन विभाग ने सर्वे कर लिया है, जिससे स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

नई टिहरी। प्रतापनगर से धारकोट तक करीब छह किलोमीटर लंबे कच्चे ऐतिहासिक मार्ग को अब एडीबी योजना के तहत नए स्वरूप में विकसित किया जाएगा।

राजशाही काल में इस मार्ग से टिहरी रियासत के महाराजा प्रताप शाह व उनकी महारानी की सवारी जाया करती थी, उसी मार्ग को अब पर्यटन ट्रैक रूट के रूप में विकसित किया जाएगा।

इस मार्ग से गुजरते हुए टिहरी झील, चंद्रबदनी मंदिर, टिहरी शहर व सुरकंडा मंदिर का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। इस मार्ग का पर्यटन विभाग की ओर से सर्वे करवा दिया गया है।

राजशाही के दौर में प्रतापनगर टिहरी नरेशों की ग्रीष्मकालीन राजधानी हुआ करती थी। जानकारी के अनुसार उस समय यह मार्ग टिहरी से धारकोट, प्रतापनगर व लंबगांव होते हुए उत्तरकाशी तक प्रमुख आवागमन मार्ग था।

धारकोट गांव के पूर्व प्रधान गंभीर सिंह, मेहरबान सिंह, प्रधान योगेंद्र सिंह ने बताया कि राजशाही काल में महाराजा प्रताप शाह और महारानी को पालकी में बिठाकर इसी मार्ग से प्रतापनगर लाया व ले जाया जाता था। वर्ष 1948 में महाराजा ने इस मार्ग का चौड़ीकरण कराया था और स्वयं जीप से यात्रा कर टिहरी से प्रतापनगर पहुंचे थे।

धारकोट से प्रतापनगर तक यह मार्ग लगभग छह किमी लंबा है। इस मार्ग से गुजरते हुए टिहरी झील, चंद्रबदनी मंदिर, टिहरी शहर व सुरकंडा मंदिर का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। इस ऐतिहासिक मार्ग पर तांबा डांडी नामक एक गुफा भी स्थित है।

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार कभी इस गुफा से तांबे का खनन किया गया था। ग्राम प्रधान धारकोट योगेंद्र सिंह ने बताया कि गुफा के भीतर जटिल और भूल-भुलैया जैसा क्षेत्र है। जिसको लेकर पर्यटन विभाग की ओर से सर्वे किया जा चुका है।

एडीबी योजना के अंतर्गत इस मार्ग का विकास न केवल ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण में सहायक होगा, बल्कि स्थानीय पर्यटन को भी बढ़ावा देगा। इससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और प्रतापनगर को पर्यटन मानचित्र पर एक नई पहचान मिलेगी।

धारकोट से प्रतापनगर मार्ग को पर्यटन ट्रैक रूप में विकसित करने के लिए एडीबी प्रोजेक्ट में प्रस्तावित है। इस मार्ग का पर्यटन विभाग की ओर से सर्वे कर दिया गया है।


– सोबत सिंह राणा, जिला पर्यटन विकास अधिकारी, टिहरी।

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