Big Breaking:-मंदिरों के पुजारियों को दक्षिणा नहीं, अब वेतनमान और सेवा सुरक्षा भी; उत्तराखंड का BKTC मॉडल बना मिसाल

उच्चतम न्यायालय में सरकारी मंदिरों के पुजारियों के वेतन पर बहस के बीच, बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) एक मिसाल पेश कर रही है।

देहरादून। सरकारी नियंत्रण वाले मंदिरों के पुजारियों व कर्मचारियों के वेतन और सेवा शर्तों का मुद्दा उच्चतम न्यायालय तक पहुंच गया है।

अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की जनहित याचिका ने यह बहस छेड़ दी है कि जब सरकारें मंदिरों का प्रशासन और आय नियंत्रित करती हैं, तो वहां सेवा देने वाले पुजारियों को सम्मानजनक वेतन और सुविधाएं क्यों नहीं मिलतीं।

ऐसे में श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) देश के सरकार नियंत्रित मठ-मंदिरों के लिए उदाहरण प्रस्तुत कर रही है। बीकेटीसी के अधीन सभी धार्मिक प्रतिष्ठानों में बकायदा सरकारी वेतनमान लागू है।

पुजारियों और कर्मचारियों को राजकीय कर्मियों की तर्ज पर वेतनमान के साथ सेवा-सुरक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। यही नहीं, पुजारियों को मंदिरों से होने वाली आय में हिस्सेदारी भी दी जा रही है।

बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि पूजा संवर्ग से जुड़े कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों को दूर करने के लिए शासन स्तर पर गंभीरता से पहल की गई है। बीकेटीसी के अंतर्गत विभिन्न श्रेणी के पुजारी नियमित सेवा ढांचे में कार्यरत हैं और उन्हें ग्रेड पे आधारित वेतन व्यवस्था दी जा रही है।

समिति के अनुसार पुजारी वर्ग 2000 और 2400 ग्रेड पे श्रेणी में कार्य कर रहा है, जबकि रावल और नायब रावल के लिए 2800 ग्रेड पे निर्धारित है। कुछ श्रेणियों में यह व्यवस्था 4200 ग्रेड पे तक पहुंचती है।

मंदिरों के पुजारियों को केवल दक्षिणा पर निर्भर नहीं छोड़ा गया, उन्हें राजकीय कर्मचारियों की तरह नियमित वेतन व आय में हिस्सेदारी भी प्रदान की जाती है।

‘बीकेटीसी से संबद्ध पुजारियों की भूमिका केवल धार्मिक कर्मकांड तक सीमित नहीं है, श्रद्धालुओं के लिए पूजा-अर्चना व्यवस्था कराने और धामों की परंपराओं के संरक्षण में भी उनकी भूमिका अहम है। बीकेटीसी पुजारियों को ग्रेड पे आधारित वेतन प्रदान कर रहा है।’
– हेमंत द्विवेदी, अध्यक्ष-बीकेटीसी

पूजा परंपराओं व सुविधाओं का प्रबंधन करती समिति

श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति की स्थापना 1939 के श्री बदरीनाथ और श्री केदारनाथ मंदिर अधिनियम के तहत की गई थी।

समिति का प्राथमिक उद्देश्य बदरीनाथ और केदारनाथ धाम की पूजा परंपराओं, उनकी विशाल संपत्तियों और लाखों तीर्थयात्रियों की सुविधाओं का व्यवस्थित संचालन करना था।

प्रशासनिक रूप से, इसमें राज्य सरकार की ओर से मनोनीत 17 सदस्य होते हैं। बीकेटीसी लगभग 47 संबद्ध मंदिरों व 20 धर्मशालाओं की देखरेख करती है।

यह संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सात विद्यालय चलाती है और गुप्तकाशी में एक आयुर्वेदिक फार्मेसी का संचालन भी करती है। आदि गुरु शंकराचार्य और पौराणिक ग्रंथों की विरासत को सहेजने का काम यह संस्था कर रही है।

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