देहरादून में तृतीय गढ़वाल राइफल्स के पूर्व सैनिकों ने बटालियन का 110वां स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर बलिदानियों को श्रद्धांजलि दी गई और पूर्व सैनिकों ने अपनी सेवाकाल की यादें साझा कीं।
देहरादून। 20 अगस्त 1916 को लैंसडौन से शुरू हुआ तृतीय गढ़वाल राइफल्स का सफर गुरुवार को 111वें वर्ष में पहुंच गया। इस गौरवशाली अवसर पर दून में रह रहे बटालियन के पूर्व सैनिक एक बार फिर साथ जुटे।
अजबपुर स्थित विरासत फार्म में हुए स्थापना दिवस समारोह में बलिदानियों को श्रद्धांजलि दी गई और पूर्व सैनिकों ने सेवाकाल के दिनों की यादों के साथ रण के किस्से साझा किए।
बलिदानियों को श्रद्धासुमन अर्पित किए
कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व सैनिक समिति तृतीय गढ़वाल राइफल्स के अध्यक्ष कैप्टन मदन सिंह गड़िया ने की। कर्नल विजय सिंह मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम की शुरुआत गढ़वाली स्मारक पर माल्यार्पण से हुई। मुख्य अतिथि और पूर्व सैनिकों ने बटालियन के बलिदानियों को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
कैप्टन गड़िया ने बटालियन की 110 वर्ष की यात्रा को याद करते हुए बताया कि प्रथम कमांडिंग आफिसर हाग के नेतृत्व में इसकी स्थापना हुई थी। इसके बाद बटालियन ने अफगान युद्ध, जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान की घुसपैठ रोकने और असम व मिजोरम में विद्रोहियों को मुख्यधारा में लाने जैसे अभियानों में अपनी वीरता का परिचय दिया।
स्थापना दिवस पर 1948 के भारत-पाक युद्ध की टिथवाल की लड़ाई विशेष रूप से याद की गई। जिसमें ले. कर्नल कमान सिंह पठानिया के नेतृत्व में बटालियन ने असाधारण वीरता दिखाई थी। एक ही युद्ध में बटालियन को एक महावीर चक्र, 18 वीर चक्र, दो शौर्य चक्र और 19 मेंशन-इन-डिस्पैच मिले थे। पूर्व सैनिकों ने कहा कि यह शौर्यगाथा आज भी बटालियन की पहचान और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है।
समारोह के बाद पूर्व सैनिकों का पुनर्मिलन और भी खास रहा। वर्षों पुराने साथियों ने एक-दूसरे से मुलाकात की, सेवा के दिनों के किस्से सुनाए और रणभूमि से जुड़े अनुभव साझा किए। इस दौरान उन साथियों को भी याद किया गया, जो अब उनके बीच नहीं हैं।