Big Breaking:-इन सरकारी सुविधाओं से पैदल हैं ये मंत्री, ना मिला बंगला, सरकारी गाड़ी भी नहीं हुई नसीब

इन सरकारी सुविधाओं से पैदल हैं ये मंत्री, ना मिला बंगला, सरकारी गाड़ी भी नहीं हुई नसीब

कैबिनेट विस्तार के बाद उत्तराखंड में नए मंत्रियों को अभी तक न तो सरकारी आवास मिला है और नहीं उन्हें सरकारी गाड़ी मिल पाई है.

देहरादून: धामी सरकार में पहले तो विधायकों को चार साल तक मंत्री पद का इंतजार करना पड़ा और अब जब मंत्रालय मिला भी तो सरकारी सुविधाओं के लिए शासन का मुंह ताकना पड़ रहा है.

उत्तराखंड में धामी सरकार के कैबिनेट विस्तार को दो हफ्ते बीत चुके हैं, लेकिन अब तक मंत्रियों को ना तो आवास मिला है और ना ही सरकार गाड़ी नसीब हो पाई है.

उत्तराखंड में हाल ही में हुए कैबिनेट विस्तार के बाद राज्य को पांच नए कैबिनेट मंत्री तो मिल गए, लेकिन हैरानी की बात यह है कि दो हफ्ते बीत जाने के बाद भी इन मंत्रियों को अभी तक बुनियादी सरकारी सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं.

हालात यह हैं कि जिन मंत्रियों को पद की शपथ लिए लगभग पंद्रह दिन हो चुके हैं, उन्हें अब तक न तो सरकारी आवास मिला है और न ही सरकारी गाड़ी उपलब्ध कराई जा सकी है.

20 मार्च को हुआ था मंत्रिमंडल का विस्तार: दरअसल, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने 20 मार्च को मंत्रिमंडल का विस्तार किया था. इस विस्तार में पांच विधायकों को कैबिनेट मंत्री बनाया गया.

इनमें देहरादून जिले की राजपुर रोड से विधायक खजान दास, हरिद्वार जिले से दो विधायक मदन कौशिक और प्रदीप बत्रा, रुद्रप्रयाग से भरत चौधरी और नैनीताल से राम सिंह कैड़ा को कैबिनेट में जगह दी गई.

करीब साल के लंबे इंतजार के बाद ये विधायक, कैबिनेट मंत्री तो बन गए, लेकिन मंत्री पद मिलने के बाद भी इन नेताओं को अभी तक सरकारी सुविधाओं के लिए इंतजार करना पड़ रहा है. सामान्य तौर पर कैबिनेट मंत्री बनने के बाद नेताजी को देहरादून के यमुना कॉलोनी में सरकारी आवास आवंटित किया जाता है.

इसके साथ ही राज्य संपत्ति विभाग की ओर से उन्हें सरकारी गाड़ी और ड्राइवर भी उपलब्ध कराया जाता है, ताकि मंत्री अपने विभागीय और सरकारी कामकाज को सुचारु रूप से संचालित कर सकें, लेकिन इस बार स्थिति थोड़ी अलग नजर आ रही है.

अभी तक आवास भी नहीं मिला: कैबिनेट विस्तार को दो हफ्ते से अधिक समय बीत चुका है, इसके बावजूद इन मंत्रियों को अभी तक न तो यमुना कॉलोनी में आवास मिल पाया है और न ही सरकारी वाहन उपलब्ध कराए गए हैं. ऐसे में मंत्री फिलहाल इसका इंतजार करने को मजबूर हैं. इसके पीछे कुछ तकनीकी और प्रशासनिक कारण बताए जा रहे हैं.

दरअसल यमुना कॉलोनी में कुछ सरकारी आवासों में मरम्मत और निर्माण कार्य चल रहा है. इन कार्यों के पूरा होने के बाद ही नए मंत्रियों को आवास आवंटित किए जाने की प्रक्रिया पूरी हो पाएगी. इसी कारण फिलहाल आवास आवंटन में देरी हो रही है.

सरकारी गाड़ियों की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं: वहीं दूसरी ओर सरकारी गाड़ियों को लेकर भी प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हो पाई है. जानकारी के अनुसार राज्य संपत्ति विभाग की ओर से मंत्रियों के लिए नई गाड़ियों की खरीद की जानी है. इन वाहनों की खरीद और औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही मंत्रियों को सरकारी गाड़ियां उपलब्ध कराई जाएंगी. इसी वजह से फिलहाल उन्हें सरकारी वाहन भी नहीं मिल पाए हैं. फिलहाल मंत्रियों को टैक्सी गाड़ियों में चलना पड़ रहा है.

इस पूरे मामले पर अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजान दास का कहना है कि

जल्द ही सभी मंत्रियों को सरकारी सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाएंगी. यमुना कॉलोनी में कुछ आवासों पर काम चल रहा है, जिसके पूरा होने के बाद मंत्रियों को आवास आवंटित कर दिए जाएंगे. सरकारी गाड़ियों के खरीद की प्रक्रिया भी चल रही है और जल्द ही यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद मंत्रियों को वाहन उपलब्ध करा दिए जाएंगे.
-ख़ज़ान दास, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री-

उत्तराखंड में चर्चा का विषय: राजनीतिक तौर पर देखा जाए तो यह स्थिति थोड़ी असामान्य जरूर मानी जा रही है, क्योंकि आमतौर पर मंत्री बनने के बाद तुरंत ही उन्हें सरकारी आवास और वाहन जैसी सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाती हैं, लेकिन इस बार कैबिनेट विस्तार के बाद इन सुविधाओं में देरी होने के कारण यह मामला चर्चा का विषय बन गया है.

हालांकि सरकार और विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यह केवल प्रक्रियात्मक देरी है और जल्द ही सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएंगी. इसके बाद नए मंत्रियों को भी अन्य मंत्रियों की तरह आवास, गाड़ी और अन्य सरकारी सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाएंगी. फिलहाल स्थिति यह है कि चार साल तक मंत्री बनने का इंतजार करने वाले इन विधायकों को अब मंत्री बनने के बाद भी सरकारी सुविधाओं के लिए कुछ और समय तक इंतजार करना पड़ रहा है.

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