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Big Breaking:-मसूरी आने वाले सैलानी ग्रीनरी को और ज्यादा कर सकेंगे एक्सप्लोर, 15 एकड़ में बनेगा नेचर पार्क

मसूरी में बढ़ते पर्यटन दबाव और सीमित खुले स्थानों के बीच, मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) हुसैनगंज में 15.5 एकड़ भूमि पर एक प्रकृति उद्यान विकसित कर रहा है।

देहरादून। लगातार बढ़ते पर्यटन दबाव, सीमित खुले स्थान और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच मसूरी को एक बड़ा हरित क्षेत्र देने की तैयारी शुरू हो गई है।

मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण हुसैनगंज क्षेत्र में 15.5 एकड़ भूमि पर ऐसा प्रकृति उद्यान विकसित करने जा रहा है, जिसे केवल पर्यटन परियोजना नहीं बल्कि मसूरी के पर्यावरणीय संतुलन को राहत देने वाली पहल माना जा रहा है।

बढ़ती भीड़, घटती हरियाली व पहाड़ी शहर पर बढ़ते दबाव के बीच यह परियोजना शहर को नया ‘ग्रीन बफर’ देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों में तैयार इस परियोजना का केंद्र बिंदु यह है कि विकास हो, मगर पहाड़ी भूगोल और प्राकृतिक ढांचे पर अतिरिक्त दबाव न पड़े। इसलिए प्रस्तावित उद्यान की रूपरेखा इस तरह बनाई गई है कि प्राकृतिक ढलानों, मौजूदा पेड़ों और स्थानीय वनस्पतियों को सुरक्षित रखते हुए सुविधाएं विकसित की जाएं।

एमडीडीए का मानना है कि मसूरी में आने वाले पर्यटकों को अक्सर सीमित खुले सार्वजनिक स्थल मिलते हैं। यह उद्यान शहर के भीतर नियंत्रित, सुव्यवस्थित और पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक स्पेस उपलब्ध कराएगा।

प्राधिकरण का मानना है कि परियोजना पूरी होने के बाद यह स्थल मसूरी के पर्यटन मानचित्र पर नया आकर्षण बनेगा और स्थानीय लोगों के लिए भी प्रकृति के बीच सुकून का सार्वजनिक स्थल तैयार करेगा।

प्रकृति के बीच बनेगा बहु-आयामी हरित परिसर

एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने बताया कि प्रस्तावित ईको पार्क में कृत्रिम पहाड़ी जलाशय, घने वृक्षों के बीच पैदल वन पथ, बच्चों के लिए बाल उद्यान व युवाओं के लिए साहसिक गतिविधियों का क्षेत्र विकसित किया जाएगा।

आगंतुकों के लिए गजीबो, बैठने की खुली व्यवस्था, योग पथ और भोजनालय भी प्रस्तावित हैं। इसका उद्देश्य केवल घूमने का स्थल बनाना नहीं बल्कि लोगों को प्राकृतिक वातावरण में ठहरने, चलने और प्रकृति से जुड़ने का अवसर देना है।

स्थानीय जैव विविधता और संस्कृति का जुड़ाव

परियोजना के तहत स्थानीय प्रजातियों के पेड़-पौधों का व्यापक रोपण किया जाएगा ताकि क्षेत्र की जैव विविधता मजबूत हो।

साथ ही एक छोटा संग्रहालय भी स्थापित होगा, जिसमें मसूरी और आसपास के क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय परंपराओं और जैव विविधता से जुड़ी जानकारी प्रदर्शित की जाएगी। इससे यह स्थल केवल मनोरंजन केंद्र नहीं बल्कि सीखने और समझने का भी केंद्र बनेगा।

ईको पार्क इसलिए है अहम

  • मसूरी में बढ़ते पर्यटन दबाव के बीच नया हरित क्षेत्र
  • स्थानीय जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा
  • परिवार, बच्चों और युवाओं के लिए अलग गतिविधि क्षेत्र
  • योग, प्रकृति भ्रमण और सांस्कृतिक जानकारी एक साथ
  • पहाड़ी शहर में नियंत्रित सार्वजनिक खुला स्थान उपलब्ध होगा

मसूरी को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल बनाने की दिशा में यह परियोजना महत्वपूर्ण है, लेकिन इसमें प्रकृति से समझौता नहीं किया जाएगा। स्थानीय वनस्पतियों व प्राकृतिक ढलानों को सुरक्षित रखते हुए सुविधाएं विकसित होंगी। परियोजना में न्यूनतम कंक्रीट व अधिकतम स्थानीय सामग्री का उपयोग किया जाएगा। इससे पर्यावरणीय प्रभाव कम होगा और स्थानीय संसाधनों को बढ़ावा मिलेगा। – बंशीधर तिवारी, उपाध्यक्ष एमडीडीए

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