प्रवर्तन निदेशालय ने यूकेएसएसएससी पेपर लीक घोटाले के मास्टरमाइंड हाकम सिंह रावत की 63.30 लाख रुपये की संपत्ति कुर्क की है।
देहरादून। उत्तराखंड के बहुचर्चित यूकेएसएसएससी भर्ती परीक्षा पेपर लीक घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मास्टरमाइंड हाकम सिंह रावत पर बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने उसकी 63.30 लाख रुपये मूल्य की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (प्रोविजनल अटैच) कर दिया है।
धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत की गई इस कार्रवाई में ईडी ने कहा है कि हाकम सिंह ने भर्ती परीक्षा में पेपर लीक और अभ्यर्थियों से वसूली गई अवैध रकम को बैंक खातों, कृषि आय और संपत्ति खरीद के जरिए वैध दिखाने की कोशिश की।
इससे पहले एसटीएफ ने सितंबर 2025 में प्रस्तावित स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा से एक दिन पहले उसे दोबारा गिरफ्तार किया था। उसे अभ्यर्थियों को चयन दिलाने का झांसा देकर मोटी रकम वसूलने की साजिश के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
ईडी के अनुसार जांच की शुरुआत रायपुर थाने में दर्ज वर्ष 2021 की यूकेएसएसएससी स्नातक स्तरीय (वीडियो/वीपीडीओ) परीक्षा पेपर लीक की एफआईआर और विजिलेंस सेक्टर, देहरादून की ओर से वर्ष 2016 की परीक्षा में अनियमितताओं से संबंधित एफआईआर के आधार पर की गई।
जांच में सामने आया कि हाकम सिंह रावत, परीक्षा की प्रिंटिंग एजेंसी आरएमएस टेक्नो साल्यूशंस प्रा. लि. के कुछ कर्मचारियों, लोक सेवकों, बिचौलियों और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर एक संगठित नेटवर्क चला रहा था।
आरोप है कि यह गिरोह गोपनीय प्रश्नपत्र लीक करता, परीक्षा प्रक्रिया में हेरफेर करता और अभ्यर्थियों से मोटी रकम लेकर उन्हें फायदा पहुंचाता था। लीक प्रश्नपत्र बिचौलियों के माध्यम से अभ्यर्थियों तक पहुंचाए जाते थे और इसी अवैध कमाई से चल-अचल संपत्तियां खरीदी गईं।
95 लाख की कमाई, कृषि आय को बनाया ढाल
ईडी की वित्तीय जांच में पाया गया कि हाकम सिंह ने अभ्यर्थियों से करीब 95 लाख रुपये प्राप्त किए। उसके बैंक खातों में घोषित आय से कहीं अधिक नकद जमा मिला। आयकर रिटर्न (आईटीआर) की जांच में उसने कृषि आय दर्शाई, लेकिन वास्तविक कृषि गतिविधियां उस आय के अनुरूप नहीं मिलीं।
जांच एजेंसी का कहना है कि कृषि आय का इस्तेमाल अवैध नकदी को वैध दिखाने के लिए किया गया। एजेंसी के अनुसार अवैध कमाई को बैंक खातों में जमा कर, आयकर रिटर्न में गलत विवरण देकर और कृषि आय के दावों के जरिए वित्तीय प्रणाली में समाहित (लेयरिंग और इंटीग्रेशन) किया गया।
ईडी ने बताया कि 14 ठिकानों पर तलाशी के दौरान दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, संपत्ति संबंधी रिकॉर्ड और नकदी से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले थे। पीएमएलए धारा 50 के तहत दर्ज बयान, बैंक खातों का विश्लेषण और एसआइटी की चार्जशीटों ने भी हाकम सिंह और उसके सहयोगियों की भूमिका की पुष्टि की।
एजेंसी पहले ही विशेष पीएमएलए अदालत, देहरादून में अभियोजन शिकायत दाखिल कर चुकी है, जिसमें प्रिंटिंग एजेंसी के कर्मचारी, लोक सेवक, बिचौलिए और अन्य आरोपित शामिल हैं। मामले की आगे की जांच जारी है।
जेल से जमानत पर छूटा और फिर हुई गिरफ्तारी, परीक्षा से पहले सक्रिय मिला नेटवर्क
सितंबर 2025 में प्रस्तावित यूकेएसएसएससी स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा से ऐन पहले देहरादून पुलिस और एसटीएफ ने हाकम सिंह को उसके साथी पंकज गौड़ के साथ फिर गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार दोनों छह अभ्यर्थियों से संपर्क में थे और चयन कराने के नाम पर 12 से 15 लाख रुपये लेने की तैयारी कर रहे थे।
योजना यह थी कि यदि अभ्यर्थी अपने दम पर चयनित हो जाए तो बाद में उससे रकम वसूली जाए और यदि चयन न हो तो अगली परीक्षा में चयन कराने का भरोसा देकर पैसा समायोजित करने का झांसा दिया जाए। दोनों को पटेलनगर क्षेत्र से गिरफ्तार कर उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम) कानून के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
रसोइये से नकल माफिया बनने तक
उत्तरकाशी के मोरी क्षेत्र निवासी हाकम सिंह का सफर एक प्रशासनिक अधिकारी के यहां रसोइये की नौकरी से शुरू हुआ। बाद में हरिद्वार में आपराधिक नेटवर्क से संपर्क बढ़ा और वह उत्तर प्रदेश के नकल गिरोहों से जुड़ गया।
वर्ष 2008 में उसने पंचायत राजनीति में प्रवेश किया और 2019 में जिला पंचायत सदस्य बना। राजनीतिक प्रभाव, सरकारी ठेकों और प्रशासनिक संपर्कों के सहारे उसने अपना नेटवर्क मजबूत किया तथा सांकरी में आलीशान रिसॉर्ट सहित कई संपत्तियां खड़ी कर लीं।
जुलाई 2022 में यूकेएसएसएससी स्नातक स्तरीय परीक्षा पेपर लीक का खुलासा होने के बाद एसटीएफ ने 13 अगस्त 2022 को उसे गिरफ्तार किया था। इसके बाद भाजपा ने उसे पार्टी से निष्कासित कर दिया, गैंगस्टर एक्ट समेत कई मुकदमे दर्ज हुए और उसके रिसॉर्ट पर भी अतिक्रमण की कार्रवाई हुई।
5 सितंबर 2023 को उसे सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई थी, लेकिन दोबारा गिरफ्तारी और अब ईडी की संपत्ति कुर्की ने यह संकेत दे दिया है कि भर्ती घोटाले से जुड़े आर्थिक नेटवर्क पर भी जांच एजेंसियों का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है।