
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड के विकास को नई रफ्तार मिली है। उनके कार्यकाल में एक लाख करोड़ से अधिक की योजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास हुआ।
देहरादून। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का उत्तराखंड से विशेष लगाव किसी से छिपा नहीं है। अपने लगभग 12 वर्षों के कार्यकाल में उन्होंने प्रदेश के विकास को प्राथमिकता देते हुए एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया है।
साथ ही तकरीबन दो लाख करोड़ से अधिक की परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की है। यही कारण है कि उनके मार्गदर्शन में उत्तराखंड की विकास यात्रा ने लगातार नए आयाम स्थापित रही है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब केंद्र में पहली बार बागडोर संभाली थी उस समय प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी। बावजूद इसके प्रधानमंत्री मोदी ने प्रदेश के विकास कार्यों में कोई कमी नहीं आने दी।
इसी क्रम में उन्होंने 16,200 करोड़ की महत्वाकांक्षी चारधाम आल वेदर रोड परियोजना का शिलान्यास कर यह स्पष्ट कर दिया था कि उत्तराखंड का विकास उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। इस परियोजना ने न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा दिया, बल्कि दुर्गम क्षेत्रों में आवागमन को भी सुगम बनाया।
प्रदेश में भाजपा सरकार के गठन के बाद प्रदेश में डबल इंजन सरकार का व्यापक असर देखने को मिला। केंद्र और राज्य सरकार के बेहतर समन्वय के चलते विकास परियोजनाओं को विशेष यह कि वर्ष 2021 में पुष्कर सिंह धामी के मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद 17 बार उत्तराखंड आए। इस दौरान राज्य के लिए सबसे अधिक परियोजनाओं को स्वीकृति देने के साथ ही शिलान्यास व लोकार्पण भी किए।
इसी कड़ी में मंगलवार को दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे। इस एक्सप्रेस वे प्रदेश के विकास का नया इंजन माना जा रहा है। यह एक्सप्रेसवे न केवल दिल्ली और देहरादून के बीच दूरी और समय को कम करेगा, बल्कि औद्योगिक, पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियों को भी नई गति देगा।
साफ है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की सक्रिय भूमिका ने न केवल प्रदेश के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया है बल्कि रोजगार और आर्थिक विकास के नए अवसर भी सृजित किए हैं।
इन प्रमुख योजनाओं का किया शिलान्यास व शुभारंभ
- चारधाम आल वेदर रोड।
- ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन।
- केदारनाथ व हेमकुंड साहिब रोप वे।
- दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर।
- केदारनाथ व बदरीनाथ धाम का पुनर्निर्माण कार्य।
- जमरानी बांध परियोजना।
- लखवाड़-व्यासी जल विद्युत परियोजना।









