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Big Breaking:-उत्तराखंड सड़कों का जाल दोगुना, हवाई सेवा भी शुरू; लेकिन पहाड़ में सिमटी रोडवेज

उत्तराखंड में रजत जयंती के अवसर पर सड़कों का जाल दोगुना हो गया है, जिससे 307 नए गांव जुड़ गए हैं। पुलों की संख्या भी बढ़ी है। मैदानी इलाकों में रोडवेज बसों की संख्या बढ़ी है, लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में परिवहन निगम सीमित हो गया है।

गौलापार से कुमाऊं के लिए हेलीकॉप्टर सेवा शुरू होने से लोगों को सुविधा मिली है। लालकुआं से कई नए शहरों के लिए ट्रेन सेवाएं भी शुरू हुई हैं।

हल्द्वानी रजत जयंती के सरकारी उत्सव के बीच सड़क औैर परिवहन सुविधाओं को लेकर नैनीताल जिले की स्थिति पर नजर डालें तो बीते 25 वर्षों में काफी कुछ हासिल होने के साथ कई उम्मीदों का पूरा होना अभी बाकी है। पुराने दौर के मुकाबले सड़कों का नेटवर्क दोगुना हो चुका है। 

राज्य मार्ग, मुख्य व जिला मार्ग और ग्रामीण सड़कों को लेकर अब सड़कों के जाल की लंबाई 4032 किमी पहुंच चुकी है।

पुलों की संख्या भी बढ़ी। दूसरी तरफ परिवहन सुविधा के ढांचे पर नजर डाले तो मैदानी क्षेत्रों में रोडवेज बसों की संख्या तो बढ़ी लेकिन पर्वतीय क्षेत्रों में परिवहन निगम सिमटता नजर आया। हालांकि, हेली सेवाओं ने जरूर नई उम्मीदें भरी।

राज्य गठन के समय नैनीताल जिले में सड़कों की लंबाई 2006 किमी थी जो अब दोगुनी हो चुकी है। जिस वजह से 307 नए गांव भी सड़क सुविधा से जुड़ गए। अब सड़क से जुड़े गांवों की संख्या 1013 पहुंच चुकी है।

जबकि वाहन-पैदल पुल 112 से बढ़कर 167 हो गए। मगर गौलापार के विजयपुर, काठगोदाम के दानीजाला समेत कई अन्य गांवों में पुल की मांग पूरी होना बाकी है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों की बदहाली भी बड़ा मुद्दा है।

वहीं, परिवहन सेवाओं में रोडवेज की स्थिति में नजर डाले तो फरीदाबाद, जयपुर, हिसार, मथुरा जैसे नए रूट जुड़ने के साथ दिल्ली मार्ग पर साधारण बसों के साथ ही अब सुपरडीलक्स गाड़ियां भी नजर आती है। लेकिन हल्द्वानी से भराड़ी, सोमेश्वर, जागेश्वर, पोखरी,

लमगड़ा समेत पहाड़ के कुल 21 मार्ग पर केमू की बसें और टैक्सी ही आम लोगों का सहारा है। रोडवेज प्रबंधन का कहना है कि जल्द नई छोटी बसें अलग-अलग डिपो में पहुंच जाएगी। उम्मीद है कि इसके बाद किसी बंद मार्ग पर तो सरकारी सेवा नजर आएगी।

मुनस्यारी तक हेली की उड़ान

– गौलापार से कुमाऊं के अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, मुनस्यारी और चंपावत के लिए हेलीकाप्टर सेवा है। इससे पर्यटकों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलने के साथ-साथ जरूरी काम के लिए हल्द्वानी व अन्य जगहों पर जाने पर स्थानीय लोगों का समय भी बचता है।

ट्रेनों का दायरा भी बढ़ा

– पिछले पांच साल के भीतर लालकुआं से मुंबई के बांद्रा, अमृतसर, आनंद विहार दिल्ली की नई सेवा मिली है। दिल्ली के लिए पहले भी कई गाड़ियां थी। हल्द्वानी-काठगोदाम से अब कोलकाता, जम्मू, लखनऊ की सेवा जुड़ने से भी लोगों को फायदा हुआ। इसके अलावा पूजा स्पेशल ट्रेन के तौर पर बीच-बीच में लालकुआं से राजकोट, बेंगलुरु और वाराणसी के लिए भी संचालन होता है।

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