उत्तराखंड में पिछले पांच वर्षों में कैंसर के मामलों में 7.3% की वृद्धि हुई है, जिससे मरीजों की संख्या 12,642 हो गई है। जीवनशैली, तंबाकू और नशे के सेवन को इसके मुख्य कारण बताया गया है, राज्य पर्वतीय क्षेत्रों में जम्मू-कश्मीर के बाद दूसरे स्थान पर है।
देहरादून। उत्तराखंड में कैंसर का कहर लगातार बढ़ रहा है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम (एनसीआरपी) के अनुसार राज्य में कैंसर मरीजों की संख्या बढ़कर 12,642 हो गई है। जीवनशैली में बदलाव, तंबाकू, नशे का सेवन, पर्यावरणीय कारण तथा बढ़ती उम्र बढ़ते कैंसर के प्रमुख कारण बताए गए हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2021 में राज्य में कैंसर के 11,779 मरीज थे, जो कि अब 12,642 के पार हो चुके हैं।
पांच वर्षों में कैंसर के 863 नए मरीज सामने आए, जो करीब 7.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है। अन्य पर्वतीय राज्यों की तुलना में उत्तराखंड की स्थिति चिंताजनक है।
पर्वतीय राज्यों में जम्मू-कश्मीर के बाद दूसरे स्थान पर उत्तराखंड
जम्मू-कश्मीर में कैंसर के 14,112 मरीजों के बाद उत्तराखंड में कैंसर के सर्वाधिक 12,642 मरीज दर्ज किए गए हैं। यह संख्या हिमाचल प्रदेश के 9,566 मरीजों से करीब 3,076 अधिक है। यदि पूर्वोत्तर के पर्वतीय राज्यों को भी शामिल किया जाए, तब भी उत्तराखंड कैंसर मरीजों के लिहाज से शीर्ष राज्यों में शामिल है।
प्रदेश में कैंसर के मरीजों की संख्या में काफी तेजी से बढ़ोतरी हो रही है, उत्तराखंड में पुरुषों में फेफड़े, मुंह, आंत व पेट के कैंसर के मामले सबसे अधिक सामने आ रहे हैं। इसकी बड़ी वजह सिगरेट, बीड़ी व शराब है। शराब के साथ सिगरेट पीने से कैंसर का खतरा चार गुना बढ़ रहा है। वहीं महिलाओं में आज भी स्तन कैंसर के मामले सबसे अधिक सामने आ रहे हैं, लेकिन पहाड़ पर महिलाओं के सामने कई तरह की सामाजिक चुनौती हैं। कामकाजी होने के कारण कैंसर का पता लगने के बाद भी महिलाएं नियमित उपचार के लिए देहरादून या आसपास के शहरों में नहीं जा पातीं, इससे कैंसर का समय पर उपचार नहीं हो पा रहा है।
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डॉ. अजीत तिवारी, वरिष्ठ कैंसर सर्जन, श्री महंत इंदिरेश अस्पताल