यह व्यवस्था सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार के निर्देश पर लागू की जा रही है।
देहरादून। प्रदेश में अब वाहनों का पंजीकरण और फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करने से पहले उनकी बॉडी की तकनीकी जांच अनिवार्य होगी। मोटर टेस्टिंग लेन में आधुनिक तकनीक से जांच के बाद ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वाहन की संरचना निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप है या नहीं।
सड़क दुर्घटनाओं में वाहनों की बॉडी की खराब स्थिति के कारण होने वाले नुकसान और जनहानि को कम करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार के निर्देश पर उत्तराखंड में भी यह व्यवस्था लागू की जा रही है।
अधिक प्रभावी ढंग से परखने पर जोर
देशभर में बढ़ती बस दुर्घटनाओं के बीच यह बात सामने आई है कि वाहन की बॉडी का प्रकार भी दुर्घटना का कारक हो सकता है। कई बार खराब बॉडी हताहतों की संख्या भी बढ़ाती है। कई बसों में आग लगने के दौरान यह भी देखा गया है कि बस फायर सेफ्टी के निर्धारित मानक भी पूरे नहीं करती है।
प्रदेश में अब तक वाहन के पंजीकरण और फिटनेस की प्रक्रिया में जांच होती तो है लेकिन इसमें गंभीरता की कमी नजर आती है। नई व्यवस्था के तहत बॉडी की स्थिति और उसकी सुरक्षा क्षमता को अधिक प्रभावी ढंग से परखने पर जोर दिया जाएगा।
यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि अग्निसुरक्षा के लिहाज से तय मानकों के अनुसार ही बस बॉडी बनी हो। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य केवल वाहनों की तकनीकी स्थिति का आकलन करना नहीं, बल्कि दुर्घटना के समय यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी मानकों का पालन कराना भी है।
अपर आयुक्त परिवहन एसके सिंह ने कहा कि केंद्र द्वारा इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं इनका प्रदेश में सख्ती से अनुपालन किया जाएगा।



