उत्तराखंड परिवहन निगम ने दून-दिल्ली सुपर डीलक्स वोल्वो सेवा में 11 बसों की कटौती की है, जिससे यात्रियों को असुविधा हो रही है।
देहरादून। उत्तराखंड परिवहन निगम में लगता है यात्रियों की मांग अब बसें चलाने का कारण नहीं, उन्हें बंद करने का बहाना बन गई है। जिस दून-दिल्ली सुपर डीलक्स वोल्वो सेवा की सीटें आनलाइन बुकिंग में भरती थीं और काउंटर पर भी टिकट के लिए मारामारी रहती थी, उसी सेवा पर निगम ने सबसे पहले कैंची चला दी।
28 वोल्वो में से 11 बसें घटाकर अब महज 17 कर दी गई हैं। यानी यात्रियों की पसंद की सेवा में करीब 39 प्रतिशत की सीधी कटौती।
यह अकेला मामला नहीं है। दून से अयोध्या श्रीराम मंदिर के लिए शुरू की गई बस सेवा भी बंद कर दी गई। कटरा वैष्णो देवी की वोल्वो, जो पहले नियमित चलती थी, अब कभी-कभार ही भेजी जा रही है।
चंडीगढ़ की सुबह 7:30 और शाम चार बजे की वोल्वो भी बंद है। सवाल सीधा है, निगम यात्रियों को सुविधा देना चाहता है या धीरे-धीरे अपने ही रूट खाली करना। दून-दिल्ली वोल्वो सेवा निगम के उन रूटों में शामिल रही है, जहां यात्रियों को खींचने के लिए प्रचार की जरूरत नहीं पड़ती।
आनलाइन बुकिंग खुलते ही सीटें भरती हैं और आफलाइन टिकट भी फुल रहते हैं। इसके बावजूद बसों की संख्या 28 से घटाकर 17 कर दी गई। यह कटौती केवल 11 बसों की संख्या कम होना नहीं है। इसका सीधा असर उन यात्रियों पर पड़ रहा, जो दिल्ली के लिए सामान्य बस के बजाय समय और सुविधा को प्राथमिकता देते हुए वोल्वो चुनते हैं।
राम मंदिर की बस भी बंद, धार्मिक रूट भी ‘कभी-कभार’
अयोध्या में श्रीराम मंदिर के दर्शन के लिए दून से शुरू की गई साधारण बस सेवा को बंद कर दिया गया। यह वह रूट था, जिसे यात्रियों की धार्मिक आस्था और बढ़ती आवाजाही को देखते हुए शुरू किया गया था।
अब यात्रियों को दूसरे साधनों पर निर्भर होना पड़ेगा। वहीं, कटरा वैष्णो देवी मंदिर जाने वाली वोल्वो का हाल भी कम निराशाजनक नहीं। पहले नियमित सेवा, अब कभी-कभार संचालन। यानी जिन धार्मिक स्थलों के लिए श्रद्धालुओं को सीधी बस सुविधा देने का दावा किया गया, वहां नियमितता ही खत्म हो गई।
मुरादाबाद की छह बसें गायब, कई शहरों से टूटा कनेक्शन
बसों की कटौती का असर केवल वोल्वो तक सीमित नहीं है। मुरादाबाद की छह बसें, चांदपुर और बरेली की एक-एक, मथुरा की दो और शाहजहांपुर की एक सेवा भी बंद हो चुकी है। ऐसे में सवाल केवल एक-दो बसों का नहीं, बल्कि पूरे संचालन तंत्र की दिशा का है। एक तरफ निगम नई सेवाएं शुरू करने और यात्रियों को बेहतर परिवहन देने की बातें करता है, दूसरी तरफ चलते हुए रूटों पर बसें कम या बंद की जा रही हैं।
वोल्वो बसें अनुबंध पर संचालित होती हैं। जिन बसों का अनुबंध पूरा हो गया था, उन्हें हटा दिया गया है। अभी नई वोल्वो का करार नहीं हुआ है। इनके स्थान पर कुछ एसी बसें चलाई जा रही हैं। यात्रियों की भीड़ यदि होती है तो एक वोल्वो से दिल्ली के डेढ़ फेरे भी लगवाए जाते हैं। – सुरेश चौहान, मंडल प्रबंधक देहरादून