उत्तराखण्ड

Big Breaking:-उत्तराखंड में फैला ठगी का नया नेटवर्क, ”जेन-जी” को मोहरा बनाकर किया जा रहा खेल

साइबर ठग युवाओं को नौकरी का लालच देकर उनके पहचान पत्र और मोबाइल नंबर से कई सिम कार्ड हासिल कर रहे हैं।

देहरादून। साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाले अवैध सिम कार्ड का कारोबार अब ””जेन जी”” युवाओं को नौकरी का लालच देकर संचालित किया जा रहा है।

काल सेंटर में नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं से सिम कार्ड मांगे जा रहे हैं। इसके बाद इन सिम कार्डों का इस्तेमाल सिम बाक्स तैयार करने और लोगों को फोन कर साइबर ठगी करने में किया जा रहा है। कंपनियों की ओर से बल्क में सिम कार्ड जारी करने पर सख्ती के बाद ठगों ने यह नया तरीका अपनाया है।

जानकारी के अनुसार, साइबर अपराधी युवाओं को काल सेंटर में नौकरी दिलाने, घर बैठे काम देने और अच्छी आय का झांसा देते हैं। नौकरी की प्रक्रिया के दौरान उनसे पहचान पत्र और मोबाइल नंबर के साथ कई सिम कार्ड उपलब्ध कराने को कहा जाता है।

युवाओं को बताया जाता है कि इन सिम कार्डों का इस्तेमाल कंपनी के ग्राहकों से संपर्क करने के लिए किया जाएगा। कई मामलों में युवाओं से उनके नाम पर सिम कार्ड जारी कराकर उन्हें काल सेंटर संचालकों को सौंपने के लिए कहा जाता है।

ठग इन सिम कार्डों को एकत्र कर सिम बाक्स तैयार करते हैं। सिम बाक्स में बड़ी संख्या में सिम कार्ड लगाए जाते हैं, जिनके माध्यम से इंटरनेट या अन्य तकनीकी साधनों की मदद से एक साथ कई फोन काल की जा सकती हैं। इन काल के लिए वास्तविक मोबाइल नंबर की पहचान छिपाना आसान होता है। यही कारण है कि सिम बाक्स का इस्तेमाल साइबर ठगी, फर्जी काल सेंटर और अवैध अंतरराष्ट्रीय कालिंग में किया जा रहा है।

ठग इन सिम कार्डों को एकत्र कर सिम बाक्स तैयार करते हैं। सिम बाक्स में बड़ी संख्या में सिम कार्ड लगाए जाते हैं, जिनके माध्यम से इंटरनेट या अन्य तकनीकी साधनों की मदद से एक साथ कई फोन काल की जा सकती हैं। इन काल के लिए वास्तविक मोबाइल नंबर की पहचान छिपाना आसान होता है। यही कारण है कि सिम बाक्स का इस्तेमाल साइबर ठगी, फर्जी काल सेंटर और अवैध अंतरराष्ट्रीय कालिंग में किया जा रहा है।

कंपनियों ने कसा शिकंजा तो ठगों ने बदला तरीका

कंपनियों ने बल्क में सिम कार्ड जारी करने पर निगरानी और सत्यापन प्रक्रिया कड़ी कर दी है। इसके बाद साइबर अपराधियों ने बड़ी संख्या में अलग-अलग लोगों के नाम पर सिम कार्ड लेने का रास्ता अपनाया। ””जेन-जी”” और बेरोजगार युवाओं को आसान नौकरी का लालच देकर उनके दस्तावेज और सिम कार्ड हासिल किए जा रहे हैं।

कई युवाओं को यह जानकारी तक नहीं होती कि उनके नाम पर जारी सिम कार्ड का इस्तेमाल किस काम में किया जा रहा है। साइबर अपराधी इन नंबरों से बैंक अधिकारी, पुलिसकर्मी, बीमा एजेंट और कूरियर कंपनी का कर्मचारी बनकर लोगों को फोन करते हैं।

इसके बाद खाते की जानकारी, ओटीपी, एटीएम विवरण या मोबाइल में एप डाउनलोड कराने के नाम पर ठगी की जाती है। कुछ मामलों में निवेश, नौकरी और लोन का झांसा देकर भी लोगों से रकम ऐंठी जा रही है।

नौजवान नौकरी के नाम पर किसी अन्य व्यक्ति को अपने नाम से सिम कार्ड जारी न कराएं। अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शन की जानकारी समय-समय पर जांचते रहें। यदि कोई संदिग्ध सिम मिले तो उसे तत्काल बंद कराने के साथ पुलिस और साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत करें। नौकरी देने के नाम पर दस्तावेज या सिम कार्ड मांगने वाले लोगों से भी सावधान रहने की जरूरत है। – अजय सिंह, एसएसपी एसटीएफ

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