विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति पर मंथन कर रही है। पार्टी आरक्षित सीटों से आगे बढ़कर सामान्य सीटों पर भी अनुसूचित जाति के प्रतिनिधित्व को आजमाने की तैयारी में है।
अगले विधानसभा चुनाव में प्रदेश में अनुसूचित जाति की आरक्षित 13 सीटों के अलावा दो सामान्य वर्ग की सीटों पर भी भाजपा अनुसूचित जाति के प्रत्याशी उतारकर आरक्षित दांव खेल सकती है। प्रदेश में चल रहे शुद्धिकरण विवाद को संगठन पूरी गंभीरता से ले रहा है। लिहाजा, अंदरखाने इस पर विचार किया जा रहा है कि 13 के साथ दो और मिलाकर कुल 15 प्रत्याशी अनुसूचित जाति से हों।
2022 के चुनावी नतीजों को देखें तो प्रदेश में कुल 13 अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटें हैं। इनमें से नौ पर भाजपा और चार पर कांग्रेस के विधायक चुने गए थे। हल्द्वानी शुद्धिकरण मामले पर जिस तरह से कोर कमेटी की बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने चर्चा की है, उससे साफ है कि भाजपा इस मुद्दे को लेकर गंभीर है। संगठन का मकसद है कि आरक्षित सीटों में जीत का आंकड़ा बढ़े। लिहाजा, अंदरखाने इस पर विचार चल रहा है कि सामान्य वर्ग की भी दो सीटों पर अनुसूचित जाति के प्रत्याशियों को मैदान में उतारा जाए। ऐसा करने से संगठन अनुसूचित जाति समाज में अपनी पैठ और मजबूत करना चाहेगा।
किस अनुसूचित जाति सीट पर कौन सी पार्टी के विधायक
| विधानसभा सीट | विधायक किस पार्टी का |
| पुरोला | भाजपा |
| थराली | भाजपा |
| घनसाली | भाजपा |
| राजपुर रोड | भाजपा |
| पौड़ी | भाजपा |
| गंगोलीहाट | भाजपा |
| बागेश्वर | भाजपा |
| सोमेश्वर | भाजपा |
| नैनीताल | भाजपा |
| बाजपुर | कांग्रेस |
| भगवानपुर | कांग्रेस |
| झबरेड़ा | कांग्रेस |
| ज्वालापुर | कांग्रेस |
इसलिए कांग्रेस के लिए अहम है शुद्धिकरण का मुद्दा
2011 की जनगणना के अनुसार, राज्य की कुल 1,00,86,292 आबादी में अनुसूचित जाति की आबादी 18,92,516 यानी 18.76 फीसदी है। 2017 में भाजपा ने 13 एससी आरक्षित सीटों में से 11 सीटें जीती थीं। 2022 में यह संख्या गिरकर नौ पर पहुंच गई थी। हरिद्वार जिले की तीनों एससी आरक्षित सीटें कांग्रेस के खाते में गई थी। ऊधमसिंह नगर की बाजपुर सीट भी कांग्रेस ने जीती थी।